मंडी। करसोग-पांगणा-पज्याणु-सुकेत क्षेत्र में कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व (देव दिवाली) परंपरागत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। क्षेत्र में शाम के समय प्रत्येक घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, तुलसी के चौबारे और मंदिरों में मिट्टी के दीये जलाकर दीपदान किया गया।
पूजा-अर्चना के उपरांत सुहागिन महिलाओं ने एक-दूसरे के माथे पर तिलक लगाकर सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना की। पज्याणु निवासी ममता शर्मा और तारा शर्मा ने बताया कि देव दिवाली पर विशेष रूप से परिवार के सभी सदस्यों ने शुद्ध देसी घी के साथ खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण किया।
उनका कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। वहीं, संस्कृत विद्वान रमेश शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में गाय का घी शुक्र और बृहस्पति ग्रहों के दोषों को शांत करने वाला माना गया है। खिचड़ी में उपयोग होने वाली सामग्री चावल, उड़द दाल, सरसों का तेल, मसाले आदि नवग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उनके अनुसार सप्ताह में एक बार शनिवार को विशेष रूप से खिचड़ी खाने से ग्रह दोषों में शांति मिलती है और भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्नता प्राप्त होती है। देव दिवाली के इस पावन अवसर पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह, भक्ति और पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।