अब मनुष्य समेत किसी भी जीव या वस्तु के डीएनए एवं संरचना के रहस्य को समझना आसान होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने डीएनए से जुड़ी पॉलीमर लूपिंग की प्रक्रिया समझने के लिए आसान मॉडल विकसित किए हैं। साथ ही पॉलीमरिक लूप सिस्टम एंड लूप मैकेनिज्म के मौलिक पहलुओं को समझने के लिए सैद्धांतिक मॉडल बनाए हैं।
आईआईटी मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिरुद्ध चक्रवर्ती की देखरेख में यह शोध किया गया है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल केमिकल फिजिक्स लेटर्स में उनका अध्ययन हाल ही में प्रकाशित हुआ है। उनकी शिष्या मोमीता गांगुली इस शोध पत्र की संबद्ध लेखिका हैं। शोधकर्ताओं का दावा है कि नई प्रक्रिया से न केवल जीव वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में लूपिंग के महत्व को समझने का बल्कि नैनो-डिवाइस और पॉलीमर से मोलेक्युलर मशीन विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि पॉलीमर दुनिया में हर जगह पाए जाते हैं। मनुष्यों में भी पाए जाते हैं जो खुद विभिन्न प्रकार के पॉलीमर के संग्रह हैं। हम जो भी खाते हैं, स्पर्श करते हैं, महसूस करते हैं और इस्तेमाल करते हैं, ये सभी किसी न किसी प्रकार के पॉलीमर हैं।
पॉलीमर लूपिंग की प्रक्रिया
रसायनिक प्रतिक्रियाएं बड़ी तीव्रता से घटित होती हैं। लूपिंग की इन प्रतिक्रियाओं की गति को समझने के लिए गणित के एक अति सरल एक पक्षीय मॉडल तैयार किया है ताकि पॉलीमर की लंबाई, रिलेक्सेशन समय और बांड की लंबाई जैसे सरल मापदंडों के आधार पर इसमें शामिल काइनेटिक्स का कोई सिद्धांत सामने आ सके। विशेष कर लंबे पॉलीमर के सिरों के बीच संपर्क की अधिकता पाई जाती है और ये जैविक पॉलीमर के लिए जरूरी हैं।
डीएनए से यह है संबंध
हमारे जेनेटिक पॉलीमर डीएनए की लूपिंग इसके लिए हमारे ब्लू प्रिंट और एमीनो एसीड (जिनसे प्रोटीन बनता है) के वाहक का काम करने के लिए जरूरी है। पॉलीमर का एक क्रम में लूप बनना अनिवार्य है ताकि वे अपने होने का उद्देश्य पूरे करें।
यह है महत्व
साइंस में इस वक्त 1200 प्रकार के डीएनए टेस्ट मौजूद हैं। डीएनए टेस्ट की मदद से आपके किसी शख्स के साथ क्या संबंध हैं, इस बारे में पता चलता है। यानी इस टेस्ट से आपके साथ आपके माता-पिता, भाई-बहन, दादा दादी, खानदान, वंश आदि का पता चलता है। इस टेस्ट के जरिये कई बार अपराधों को सुलझाने में तो कभी उत्तराधिकारी साबित करने में मदद मिलती है। इसके अलावा रसायन एवं जीव विज्ञान के कई प्रश्नों के उत्तर देने में प्रायोगिक विधियां और प्रक्रियाएं अपर्याप्त होती हैं, जिसमें यह मदद करता है।