जरल कॉलोनी पंडोह में नागचला से मनाली फोरलेन प्रभावितों ने मांगों को लेकर एनएच प्राधिकरण के भू-अर्जन अधिकारी कार्यालय का घेराव किया। प्रभावितों ने प्रदेश सरकार और भू-अर्जन अधिकारियों के विरोध में नारेबाजी की।
सबसे पहले प्रभावितों ने भू-अर्जन अधिकारी पंडोह के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यालय में अधिकारी न होने के बाद प्रभावितों में आक्रोश और बढ़ गया। फिर वहां से भू-अर्जन अधिकारी कार्यालय बिलासपुर की ओर रुख किया जो वहां से लगभग 400 मीटर दूर था। प्रदर्शन से लगभग 20 मिनट के लिए एनएच पर वाहनों की आवाजाही एक तरफ से बंद रही। फोरलेन प्रभावितों ने कहा कि जब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं होगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रभावितों को न तो मुआवजा दिया गया है और न ही उनका पुनर्वास किया गया है। उन्हें जमीन और मकान खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इस कार्रवाई से गुस्साए प्रभावितों ने घेराव किया और कार्यालयों के बाहर दिए गए नोटिसों को जलाकर अपना विरोध जताया। फोरलेन प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने कहा कि कुछ दिन पहले राज्य सरकार ने एनएचएआई के माध्यम से प्रभावितों को अपनी जमीनें और मकान खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं जबकि अभी तक न तो मुआवजा तय किया गया है और न ही पुनर्वास का कोई प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि जब तक मुआवजा और पुनर्वास का प्रावधान नहीं होगा तब-तक जमीनों पर कब्जा नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के भू-अधिग्रहण अधिकारी और एनएचएआई के अधिकारी 2013 में बनाए गए नए भूमि अधिग्रहण कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाने पर लगे हुए हैं और तानाशाही तरीके से जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है जिसे अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि कोई भी किसान अनदेखी के चलते अपनी जमीन पर उचित मुआवजा दिए बिना बुल्डोजर नहीं चलने देगा और जब ठेकेदार की मशीनरी मौके पर काम के लिए आएगी तो उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है और ऐसे में उनके नुकसान की जिम्मेवार कंपनी, एनएचएआई और सरकार होगी। प्रभावितों के इस विरोध प्रदर्शन में मंडी जिला की अन्य सामाजिक संस्थाओं, पूर्व सैनिक संगठन, नागरिक अधिकार मंच, किसान बचाओ अभियान ने भी अपना सहयोग दिया। प्रदर्शनकारियों को आश्वासन देते हुए एलएओ दर्शन कालिया ने कहा कि जिन मुद्दों पर प्रभावित मांग उठा रहे हैं वे उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं और वे केवल एनएचएआई एक्ट के तहत जैसी शक्तियां मिली हैं, उसी के अनुरूप कार्रवाई कर रहे हैं। जिससे प्रभावित संतुष्ट नहीं दिखे और उनके खिलाफ भी नारेबाजी की।