राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर में चल रहे राज्य स्तरीय एनसीसी प्रशिक्षण शिविर में कैडेट्स के बीमार होने से क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई है। सेना अधिकारियों ने शिविर में चिकित्सक की नियुक्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखित रूप से मांग की थी। बावजूद इसके विभाग ने शिविर में महज दो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को तैनात किया। शिविर में 19 स्कूलों और छह कॉलेजों के 400 से अधिक कैडेट भाग ले रहे हैं। ऐसे में विभाग की कोताही और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी कैडेट्स पर भारी पड़ी है।
रिवालसर वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में 11 जुलाई से एनसीसी प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। इसी दौरान कामना देवी (15) पुत्री बलवीर निवासी साईगलू की मौत हो गई है। तबीयत बिगड़ने पर कामना को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी ले जाया गया। रिवालसर अस्पताल में चिकित्सकों की कमी इस छात्रा पर भारी पड़ी है। पीएचसी रिवालसर में यदि आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो छात्रा को समय रहते इलाज मुहैया करवाया जा सकता था। वहीं, यदि शिविर में चिकित्सक की तैनाती होती तो शायद समय पर इलाज मिलने से कामना की जान बच जाती। इसके अलावा गत सप्ताह ढलवान में हुए जीप हादसे में के घायलों को भी पीएचसी रिवालसर में लाया गया था। लेकिन, यहां पर घायलों को मरहम पट्टी तक नसीब नहीं हो पाई थी।
क्षेत्र के हेमराज, पुष्पराज, निक्का राम, खिमा राम, किशन चंद, पूर्ण चंद ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सक आपातकालीन सेवा न होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद इसके समस्या की सुध नहीं ली जा रही है। वहीं, द्वितीय वाहिनी कमांडर पीयूष अग्रवाल ने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी मंडी को प्रशिक्षण शिविर में डाक्टर की तैनाती के लिए लिखित रूप से मांग की गई थी।
कोट्स
चिकित्सकों के कमी के चलते हेल्थ वर्करों को शिविर में तैनात किया गया था। रिवालसर पीएचसी में भी चिकित्सकों की कमी को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। उच्च अधिकारियों को समस्या के बारे में अवगत करवा दिया गया है। जल्द ही समस्या के समाधान की उम्मीद है।
डा. डीआर शर्मा सीएमओ मंडी