जिला में आग लगने की स्थिति में दुर्गम क्षेत्र संवेदनशील जोन में आते हैं। सिराज क्षेत्र में सैकड़ों गांवों में मकान काष्ठकुणी शैली में बने हैं। इसके अलावा उत्तरशाल, चौहारघाटी, करसोग, में अधिकतर काष्ठकुणी शैली में बने गांव बसे है। इन दुर्गम क्षेत्रों में कई बार अग्निकांड हो चुके हैं। कुछ गांवों तक सड़क सुविधा न होने के कारण फायर बिग्रेड पहुंचना भी मुमकिन नहीं है। सिराज क्षेत्र में कुछ ऐसे गांव भी हैं जो जिला मुख्यालय से 150 किमी दूर स्थित है।
इन गांवों तक मंडी व कुल्लू फायर स्टेशनों से फायर बिग्रेड गाड़ियां पहुंचने तक सब कुछ राख हो जाता है। इन क्षेत्रों में फायर स्टेशन तो दूर फायर पोस्ट तक नहीं है। सड़क भी ठीक नहीं है। मंडी में जिला मुख्यालय पर एक फायर स्टेशन व दो फायर पोस्ट जोगिंद्रनगर व सरकाघाट में चल रहे हैं। वहीं, सुंदरनगर में आगजनी की घटना पेश आने पर बीबीएमबी की फायर बिग्रेड राहत कार्य करती है। मंडी फायर स्टेशन में इन दिनों कुल 31 कर्मी तैनात है।
फायर स्टेशन में एक एएफटी, एक वाटर वोजर, एक क्यूआरबी व रेस्क्यू तथा एक मोटर साइकिल है। वहीं, फायर पोस्टों सरकाघाट व जोगिंद्रनगर में दो-दो गाड़ियां मौजूद है। मंडी शहर में 83 हाइड्रेंट है। इनको दीवाली के नजदीक आते ही अग्निशमन विभाग ने आईपीएच के माध्यम से दुरूस्त करवा दिया है। वहीं, 24 अक्तूबर से दीवाली तक सभी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
जिला में तीन अलग-अलग क्षेत्रों जंजैहली, करसोग व चैलचौक में फायर पोस्ट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इन क्षेत्रों में जंजैहली सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रस्तावना महज कागजों तक ही सिमटी है। इससे इन क्षेत्रों में आज भी करोड़ों रुपये की संपदा सुरक्षित नहीं है। करसोग व जंजैहली में फायर पोस्ट खोलने की तमाम औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई हैं, लेकिन धरातल पर परिणाम शून्य ही हैं।
छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी जिला में करोड़ों रुपये से बनी देवताओं की कोठियां भी इन्हीं सिराज क्षेत्र में विद्यमान हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में फायर पोस्ट न होने से करोड़ों रुपये की संपत्ति अग्निकांड की घटनाओं की दृष्टि से सुरक्षित नहीं है।
सिराज क्षेत्र ही संवेदनशील जोन में आता है। यहां पर अधिकतर मकान काष्ठकुणी शैली में बने हैं। इससे आग लगने पर नुकसान की संभावना अधिक है।
......हर्षवीर सेन कार्यकारी अग्निशमन अधिकारी मंडी फायर स्टेशन