मई माह में ही गर्मी ज्यादा बढ़ने से जल शक्ति विभाग की सिंचाई योजनाओं में भी पानी की किल्लत शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। इस बार मई माह में ही गर्मी ज्यादा बढ़ने से जल शक्ति विभाग के प्राकृतिक जल स्रोत भी सूखने लगे हैं। इस कारण उठाऊ पेजयल योजनाओं में भी पानी 25 फीसदी तक कम हो गया है। इसके अलावा सिंचाई योजनाएं भी प्रभावित होना शुरू हो चुकी हैं।
जोगिंद्रनगर डिविजन में जल शक्ति विभाग की ओर से चिह्नित 58 सिंचाई पेयजल योजनाओं के लिए बनाई गई अधिकांश कूहलों में पानी पर्याप्त मात्रा में न होने से किसानों की खेतीबाड़ी पर भी बुरा असर पड़ना शुरू हो चुका है।
उपमंडल के करीब 60 हजार पेयजल उपभोक्ताओं के लिए क्रियान्वित 150 से अधिक पेयजल योजनाओं की बात करें तो 40 प्रतिशत पेयजल योजनाएं पानी की किल्लत से प्रभावित होनी शुरू हो चुकी हैं। ग्रामीण क्षेत्र नोहली, त्रैंबली, ब्यूंह, भराडू और लडभड़ोल क्षेत्र में पानी की किल्लत को पूरा करने के लिए जल शक्ति विभाग ने ट्यूबवेल से भी पानी पहुंचाने का प्रयास शुरू किया है। वहीं, पेयजल योजनाओं को इंटरकनेक्ट कर भी पानी की आपूर्ति की जा रही है। कुछ जगहों पर पानी की आपूर्ति के समय में भी बदलाव करना पड़ा है।
सूखे जैसे हालातों की आशंका को देखकर जल शक्ति विभाग के करीब 400 अधिकारी और कर्मचारी फील्ड पर मोर्चा संभालते हुए पानी की बर्बादी को रोकने में जुटे हुए हैं। हालांकि अभी तक पानी की किल्लत अधिक नहीं है, लेकिन गर्मी का सिलसिला अगर ऐसे ही जारी रहा तो एक सप्ताह के भीतर पानी को लेकर हाहाकार मच सकता है। इसकी संभावना को देखते हुए जल शक्ति विभाग ने अभी से ही पानी की आपूर्ति को अपने नियंत्रण में कर उपभोक्ताओं से भी पानी का इस्तेमाल पूरी सावधानीपूर्वक करने का आह्वान किया है।
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इन प्राकृतिक स्रोतों में कम हुआ पानी
जोगिंद्रनगर डिविजन में जल शक्ति विभाग की ओर से चिह्नित प्राकृतिक पेयजल स्रोत फेगडू, नालागार्ड और नागचला में पानी में गिरावट आना शुरू हो चुकी है। लडभड़ोल क्षेत्र के धोली समोड़, सील क्वार और लांगणा के प्राकृतिक स्रोतों में भी गर्मी के चलते पानी सूखने लग पड़ा है। चौंतड़ा की बजगर खड्ड में भी पानी की किल्लत पेश आना शुरू हो चुकी है। इसके अलावा करसाल, कसाल में जलशक्ति विभाग की चिन्हित पेयजल योजनाओं में पानी की किल्लत का खतरा पैदा हो गया है। हालांकि उठाऊ पेयजल योजनाओं के लिए चिह्नित बिनवा और ब्यास नदी में पानी की किल्लत अभी नहीं है। वहीं जोगिंद्रनगर की गुगली खड्ड, मच्छयाल और रणा खड्ड की बात करें तो यहां पर जलस्तर कम हुआ है।
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कुछ पेयजल योजनाओं में पानी की आवक में 20 से 25 प्रतिशत तक गिरावट आई है। अगर बारिश नहीं हुई तो पानी का संकट भी गहरा सकता है। बहरहाल डिविजन के 60 हजार पेयजल उपभोक्ताओं को पानी की किल्लत का सामना न करना पड़े, इसलिए ट्यूबवेल और इंटर कनेक्ट पेयजल योजनाओं से भी पानी की आपूर्ति के प्रयास जारी है।
-राकेश कुमार, अधिशासी अभियंता जल शक्ति विभाग डिविजन जोगिंद्रनगर