मंडी। कोविड के कारण आर्थिक मंदी की मार झले रहे निजी बस संचालकों के पास इंश्योरेंस तक के पैसे नहीं हैं। जिला भर में करीब 205 बसों की इंश्योरेंस रिन्यू न होने के चलते खड़ा कर दिया गया है। ऐसे में संचालकों की कमाई पर जंग लग रहा है। इसका असर ग्रामीण रूटों पर पड़ रहा है। क्योंकि अधिकांश बसें ग्रामीण रूटों से संबंधित हैं। सरकार ने कोविड बंदिशों में पूरी राहत दे दी है। जिंदगी पटरी पर लौट आई है। यातायात भी सामान्य हो चुका है लेकिन बसें खड़ी रहने के चलते कई रूट अभी तक चल सके हैं। प्रभावित रूटों के बाशिंदों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिलाभर में कुल 460 बसों में से 255 गाड़ियां ही रूटों पर चलाई जा रही हैं।
कार्यशील पूंजी का इंतजार
इंश्योरेंस न होने के चलते गाड़ियां खड़ी हो चुकी हैं। जिससे बस मालिकों को अपनी बसों के पुर्जों व अन्य चीजों का खराब होने का खतरा भी उत्पन्न हो गया है। अब इंतजार है सरकार की उस घोषणा के पूरी होने का, जिसमें कार्यशील पूंजी जमा करवाने की बात कही है। यदि कार्यशली पूंजी जमा होती है तो गाड़ियों की इंश्योरेंस व मरम्मत करके रूटों पर भेजना शुरू कर दिया जाएगा।
गाड़ियों की इंश्योरेंस होते ही सभी रूटों को बहाल कर दिया जाएगा। सरकार जितनी जल्दी कार्यशील पूंजी जमा करवाती है, उतनी ही जल्दी बसों की इंश्योरेंस करवार सभी रुके हुए रूट बहाल होंगे। बिना इंश्योरेंस की गाड़ियां खड़ी हैं। अगर जल्द ही इन बसों को नहीं चलाया गया तो आने वाले समय में यह पूरी तरह खराब हो सकती हैं। सरकार से आग्रह है कि जल्द ही मांगों को पूरा कर राहत प्रदान करे।
-गुलशन दीवान, अध्यक्ष निजी बस ऑपरेटर यूनियन मंडी