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Mandi Disaster: 10 महीने बाद भी नहीं भरे आपदा के जख्म, फिर मंडराने लगा खतरा; मानसून से पहले सहमे सराज के लोग

Tue, 16 Jun 2026 12:17 PM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, थुनाग (मंडी)।

सार

Mandi Disaster: मंडी जिले के सराज क्षेत्र में पिछले साल आई भीषण आपदा के करीब 10 महीने बाद भी हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। थुनाग, जंजैहली, छतरी, बगस्याड और चिऊणी क्षेत्र में जर्जर सड़कें, पहाड़ियों में दरारें और अधूरे सुरक्षा कार्य लोगों की चिंता बढ़ा रहे हैं। प्री-मानसून की शुरुआत के साथ ग्रामीणों को फिर तबाही का डर सताने लगा है।
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मंडी डिजास्टर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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सराज की पहाड़ियों में मौसम बदल रहा है और इसी के साथ लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। दोपहर बाद उमड़ते बादल और हल्की फुहारें उन पुराने जख्मों को फिर से ताजा कर रही हैं, जिसने पिछले साल पूरे क्षेत्र को तबाही की ओर धकेल दिया था। करीब 10 महीने बीत जाने के बावजूद थुनाग, जंजैहली, छतरी, बगस्याड और चिऊणी के कई गांव आज भी उस आपदा के असर से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं।

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प्री मानसून की शुरुआत के साथ ही फिर चिंता बढ़ गई है। जिन पहाड़ियों से पिछले साल मलबा और पानी का सैलाब उतरा था, वहां आज भी गहरी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। कई स्थानों पर सड़कें आधी धंसी हुई हैं और अस्थायी डंगे हर बारिश में खतरे की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल भी मौसम इसी तरह बदला था और देखते ही देखते पूरा इलाका आपदा की चपेट में आ गया था। 

थुनाग-जंजैहली मार्ग पर जगह-जगह भूस्खलन के निशान अब भी मौजूद हैं। कई संपर्क मार्गों पर सफर जोखिम भरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ इलाकों में हल्की बारिश के दौरान भी पत्थर गिरने लगते हैं, जिसके चलते रात के समय आवाजाही लगभग बंद हो जाती है। केलटी, गाड़ागुशैण वाया रेशन और आसपास की सड़कों पर टूटे डंगे आज भी हालात की गंभीरता बयां कर रहे हैं।  आपदा का असर सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है। जिन परिवारों ने घर गंवाए थे, उनमें से कई अब भी सामान्य जीवन में नहीं लौट पाए हैं। कुछ लोग रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं, तो कुछ अस्थायी ढांचों में किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं।

पिछले साल भूस्खलन और बाढ़ में सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन बह गई थी। खेतों में अब भी मलबा जमा है और खेती पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी आमदनी का बड़ा सहारा टूट गया है। 

शिक्षा व्यवस्था भी अधर में है। सुराह, भेखली और रेशन जैसे क्षेत्रों में स्कूल अब भी अस्थायी भवनों में चल रहे हैं। लंबाथाच कॉलेज का निर्माणाधीन साइंस ब्लॉक भी मलबे और सुरक्षा कार्यों के बीच फंसा हुआ है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले साल की आपदा के बाद बड़े स्तर पर सुरक्षा और पुनर्वास के वादे किए गए थे, लेकिन एक साल बाद भी कई इलाके असुरक्षित बने हुए हैं। मानसून से पहले उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन ज़मीनी तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

हालात नहीं सुधरे तो बरसात में तबाही
21 मासूम जिंदगियों की मौत और सैकड़ों जमींदोज हुए मकान चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा नहीं बन सकते थे। हालात अब भी पूरी तरह सही नहीं हो पाए हैं।- चतर सिंह, चिऊणी 
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नेताओं को सिर्फ वोट की चिंता है
नेताओं को सिर्फ वोट की चिंता है, हमारे मलबे में दबे भविष्य से किसी को कोई सरोकार नहीं। हालात सुधारे नहीं गए तो आने वाली बरसात में फिर तबाही होगी।- नरेश कुमार, धरोटधार

हालात सुधारने पर देना होगा ध्यान 
क्षतिग्रस्त हुई सड़कों पर एक साल में तीन दर्जन से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं, लेकिन चुनाव में इस लापरवाही पर चर्चा नहीं। हालात सुधारने की तरफ ध्यान देना होगा।- ललित कुमार, जंजैहली 

अस्थायी भवनों में चल रहे हैं स्कूल
केलटी, जंजैहली, गाड़ागुशैण वाया रेशन बस सेवा ठप है। स्कूल आज भी अस्थायी भवनों में चल रहे हैं। लंबाथाच कॉलेज का साइंस ब्लॉक आज भी मलबे ढेर में दबा है। -पिकू टोकरा, लंबाथाच
 
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