मंडी। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में शनिवार को पड्डल और वल्लभ डिग्री कॉलेज परिसर में देवलोक का अलौकिक नजारा देखने को मिला। यहां एक साथ सैकड़ों देवी-देवता विराजमान हुए। हजारों लोगों ने देवी-देवताओं के आगे शीश नवाया और सुख समृद्धि की कामना की।
सैकड़ों देवलू बाम, करनाल, रणसिंगे और शहनाइयों से जुगलबंदी कर देवता की शान में देव ध्वनियां छेड़ते रहे। सोने-चांदी की पालकियों में सवार देवी-देवता एक दूसरे से मिलन करते नजर आए। देव मिलन के इस नजारे को हजारों लोगों ने कैमरे में कैद किया। सदियों से देव मिलन की अनूठी परंपरा का निर्वाह करने वाली छोटी काशी के लिए इस महाशिवरात्रि मेले का यह ऐतिहासिक दिन रहा।
माहूंनाग, देवता छांजणू, देव घटोत्कच, देव चुंजवाला ऋषि, देव विष्णु मतलोड़ा, देव हुरंग नारायण, देव पशाकोट, माता हिडिंबा, मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग आदि गणपति, देव तुंगासी समेत अन्य देवी-देवता पड्डल मैदान में विराजमान हुए। चौहारघाटी से पहुंचे देवी-देवता पड्डल में विराजे। इनसे आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की दिनभर खूब भीड़ उमड़ती रही। बुजुर्गों से लेकर बच्चों में देव आस्था के प्रति खासा उत्साह देखा गया।
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टारना में बड़ादेव के दर्शन के लिए पहुंचे लोग
टारना में बड़ादेव कमरुनाग के दर्शन के लिए सुबह से ही भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। दो दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद शनिवार को बड़ादेव के दर्शन के लिए लोगों को लाइनों में लगना पड़ा। लोगों की उमड़ी भीड़ से ई-टैक्सियों और ऑटो का कारोबार भी खूब हुआ। कई लोग पैदल भी टारना पहुंचे और बड़ादेव से आशीर्वाद लिया।
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देव दर्शन पथ पर आसानी से हुए देवताओं के दर्शन
पड्डल मैदान में देवी-देवताओं के बैठने के लिए देव-दर्शन पथ बनाया गया है। मैदान की सीढ़ी को चौड़ा करवाया गया है। इस कारण देवताओं को विराजने में आसानी रही और श्रद्धालु भी दर्शन करते हुए आगे की तरफ बढ़ते रहे। सराज, गोहर, द्रंग और पधर से पहुंचे लोगों ने ऐसी व्यवस्था के लिए प्रशासन का आभार भी जताया।
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