मंडी शिवरात्रि महोत्सव में एक वर्ष बाद मिलते देवता
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प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के नाम से प्रसिद्ध मंडी शहर में अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के लिए सोने-चांदी से जड़ित देव रथ पहुंच गए हैं। एक सप्ताह के लिए मंडी शहर देवी-देवताओं की आवभगत में जुट गई है। वाद्य यंत्रों की देव ध्वनि से हर तरफ भक्ति का माहौल बना हुआ है।
सोमवार को करीब सौ से अधिक देवी-देवताओं ने मंडी पहुंच कर राजदेवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाई। करीब पांच दशकों बाद शिवरात्रि में पहुंचे देव चपलांदू नाग भी देव माधोराय से मिले। देव चपलांदू नाग रियासतकालीन देवता में शामिल है।
एक साल के बाद मंडी शहर में देव महाकुंभ के लिए सराज, उत्तरशाल, सनोर, गोहर और चौहारघाटी क्षेत्रों से देवी-देवताओं के रथ पहुंचने से मंडी शहर में आस्था का सैलाब भी उमडने लगा। सोमवार को करीब सौ से अधिक देवी-देवताओं ने मंडी रियासत के देवता माधोराय के दरबार में हाजिरी लगाई।
दिन भर मौसम साफ रहा। लेकिन शाम साढ़े चार बजे बारिश होने के बाद वाद्य यंत्रों की थाप पर देवी-देवताओं का आने का सिलसिला जारी रहा। इस बार रियासतकालीन देवता चपलांदू नाग भी करीब पांच दशकों के बाद शिवरात्रि में पहुंचे। राज देवता माधोराय और देव छपलांदू नाग का कई दशकों बाद मिलन हुआ। मंडी में प्रवेश करते ही देव मिलन से भक्त भी भावुक हो उठे।
सर्व देवता कमेटी मंडी के प्रधान शिवपाल शर्मा ने बताया कि सोमवार को करीब सौ से अधिक देवी-देवता मंडी पहुंच गए हैं। करीब पचास सालों के बाद सराज क्षेत्र के देव चपलांदू नाग मानगढ़ ने मंडी पहुंच कर राजदेवता माधोराय से मिले।
उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के साथ आए कारदारों और देवलुओं के ठहरने और खाने की मेला कमेटी की ओर से बेहतर व्यवस्था की गई। मेले में आमंत्रित कई देवता बुधवार को मंडी पहुंचेंगे।