थुनाग (मंडी)। ईको सेंसिटिव जोन के बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन ने जोनल मास्टर प्लान में दी जा रहीं योजनाओं में बदलाव किए हैं। प्रशासन ने अब सभी विभागों और प्रभावित पंचायतों को 15 से 20 साल तक की दीर्घकालिक योजनाओं के प्रस्ताव देने को कहा है। इसके लिए पांच दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।
ग्रामीण मास्टर प्लान के लिए 25 जनवरी तक योजनाएं दे सकेंगे। बीडीओ सराज प्रियंका वर्मा ने बताया कि पहले पंचायतों से मात्र एक साल का मास्टर प्लान मांगा था। अब वन विभाग से चर्चा के बाद प्रत्येक पंचायत का अगले 15 से 20 वर्षों तक का मास्टर प्लान देने को कहा गया है।
एसडीएम थुनाग रमेश कुमार ने बताया कि ईको सेंसिटिव जोन को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों में जागरूकता की कमी थी। वन विभाग ने विस्तार से योजना के बारे में अवगत करवाया है। ईको सेंसिटिव जोन संघर्ष समिति के संयोजक नरेंद्र रेड्डी ने बताया कि गांव स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। रविवार को ग्राम पंचायत गुड़ाह और संगलवाड़ा में विशेष ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं।
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ईको सेंसिटिव जोन की सही जानकारी न होने से भ्रांतियां फैल रही हैं। ग्रामीणों को भय है कि उनके अधिकार छिन जाएंगे। ऐसा कुछ नहीं है। लोगों को सहूलियत होगी नुकसान नहीं।
-सुरेंद्र कश्यप, डीएफओ नाचन एवं निगरानी समिति के सचिव