आईआईटी मंडी का कैंपस निर्माण कर रही सुप्रीम इंडिया कंपनी और हिमाचल प्रदेश भवन एवं सड़क निर्माण यूनियन (सीटू) की कमांद इकाई के बीच काम शुरू करने को समझौता हो गया। बुधवार से निर्माण कार्य शुरू होगा। अब कार्य स्थल पर बिना पहचान पत्र के प्रवेश निषेध होगा। यदि कोई श्रमिक सुरक्षा उपकरणों व पहचान पत्र के बगैर पाया जाएगा तो उस दिन उसकी अनुपस्थिति लगाई जाएगी।
मजदूर यूनियन ने वेतन की अदायगी और पिछले डेढ़ वर्ष के भविष्य निधि फंड जमा करवाने के लिए हड़ताल की थी। इसी बीच 20 जून को धरना प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर ठेकेदार के लोगों ने गोलियां चला दीं, जिसमें छह मजदूर घायल हो गए थे। जिसके बाद भी आईआईटी के नार्थ कैंपस में निर्माण कार्य बंद चल रहा है। कंपनी ने भविष्य निधि के खाते में लगभग 56 लाख रुपये जमा करवा दिए और अप्रवासी मजदूरों को छोड़कर लगभग सभी मजदूरों के वेतन का भुगतान कर दिया है।
यूनियन की ओर से केंद्रीय लोक विभाग के कार्यालय के बाहर काम को जल्दी शुरू करने को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। गत सोमवार को यूनियन और कंपनी प्रबंधन के बीच काम शुरू करने को लेकर सहमति बन गई। कंपनी की ओर से प्रोजेक्ट समन्वयक श्रीकांत, गुलाब चंद शर्मा व कंपनी के जीएम राजेंद्र शर्मा और यूनियन की ओर से सीटू के जिला महासचिव राजेश कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष परस राम, सह सचिव नरेश, रवि चंद तथा स्थानीय इकाई के प्रधान सुंदर, उपप्रधान रीता देवी और कोषाध्यक्ष किशन ने इस वार्ता में भाग लिया।
दोनों पक्षों में अभी यह सहमति बनी की सभी मजदूरों को काम पर रखा जाएगा। यदि कंपनी को भविष्य में कुछ श्रमिकों को निकालना होगा तो कंपनी वरिष्ठता सूची तैयार करेगी और श्रम कानूनों के तहत छंटनी की जाएगी। मजदूरों को छंटनी लाभ भी श्रम कानूनों के तहत दिया जाएगा। कंपनी दो शिफ्टों में काम करवाएगी। कार्य स्थल पर आठ शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। प्रवासी श्रमिकों के लिए बनाए गए कैंप में भी सुधार किया जाएगा। भविष्य में कोई भी समस्या होगी तो उसे दोनों पक्ष वार्ता के माध्यम से सुलझाएंगे । श्रमिकों को पहचान पत्र और सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएंगे।