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Mandi News: गुच्छी कारोबार के लिए देशभर में मशहूर है कुथाह मेला

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मेले में 5-6 हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है गुच्छी
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देश के पांच और सात सितारा होटलों में रहती है अधिक मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। जिले की सराज घाटी में 22 मई से शुरू होने वाला कुथाह मेला जहां अपनी लोक परंपराओं के लिए जाना जाता है, वहीं मेले में होने वाला लाखों रुपये का गुच्छी कारोबार के कारण मेला विश्वविख्यात है। गुच्छी की खरीद-फरोख्त के लिए हर वर्ष बड़े शहरों के व्यापारी जंजैहली में डेरा डालते हैं, जो हर वर्ष करोड़ों रुपये का गुच्छी कारोबार करते हैं। देश के पांच और सात सितारा होटलों में गुच्छी की मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय लोग बरसात के दौरान जंगलों में गुच्छी की तलाश करते हैं। सुखाने के बाद इसे मेले में 5-6 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश के विभिन्न मंचों पर मंडी जिले का पारंपरिक व्यंजन सेपू बड़ी के बाद प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी की खूब प्रशंसा करने के बाद इसे विश्व ख्याति मिली है। बड़े शहरों में आयोजित होने वाले आयोजनों में भी गुच्छी की सब्जी विशेष रूप से परोसी जाती है।
गुच्छी को एक तरह का मशरूम भी कहते हैं, जो हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक तौर पर उगता हैं। मंडी जिले के जंजैहली घाटी के लोग वर्ष भर एकत्रित की गई गुच्छी को मेले में बाहरी राज्यों से आने वाले व्यापारियों को विक्रय करते हैं। जैहली के कुथाह गांव में मनाया जाने वाला चार दिवसीय मेला यहां का प्राचीन पारंपरिक मेला है जो माता महाकाया और देव तुंगासी को समर्पित है।
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सराज घाटी के छतरी निवासी संतोष कुमार, तुले राम, कर्मचंद, देवी चंद, हेम सिंह आदि का कहना है कि गुच्छी कारोबार सदियों से चलता आ रहा है। घाटी के लोग वर्ष भर जंगलों से गुच्छी को एकत्रित कर घरों में भंडारण करते हैं। सभी को कुथाह मेले का बेसब्री से इंतजार रहता है।
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