कोल डैम में जल पर्यटन और जल क्रीड़ा गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र में पर्यटन कारोबार बढ़ने की उम्मीद जगी है। यहां शिकारा बोटिंग शुरू करने की भी योजना है। ऐसा होने पर पर्यटक कोल डैम में कश्मीर जैसा नजारा देख सकेंगे। इस बीच, वर्षों से पारंपरिक नाव चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे स्थानीय बोट मालिकों ने पर्यटन गतिविधियों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि सरकार जल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है तो स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए।
आधुनिक स्पीड बोट और क्रूज से कारोबार प्रभावित होने की चिंता
स्थानीय बोट मालिकों को आशंका है कि आधुनिक स्पीड बोट और क्रूज जैसी सुविधाएं शुरू होने से उनका पारंपरिक कारोबार प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि पारंपरिक नावों से पर्यटकों को कम खर्च में सैर करवाने का विकल्प मिल सकता है। इससे कम बजट में घूमने आने वाले पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और स्थानीय बोट मालिकों की आमदनी बढ़ने की संभावना भी रहेगी।
स्थानीय लोगों को मिलें शिकारे चलाने के लाइसेंस
बोट मालिकों ने मांग की है कि कोल डैम में शिकारे चलाने की अनुमति स्थानीय लोगों को दी जाए। उनका कहना है कि इस काम के लिए किसी बड़ी पर्यटन कंपनी के बजाय स्थानीय बोट मालिकों को लाइसेंस दिए जाने चाहिए, ताकि पर्यटन विकास का लाभ क्षेत्र के लोगों तक पहुंचे। क्षेत्र में करीब 10 से 15 परिवार पुराने बोट चलाकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
ऐहन कोल डैम के बोट मालिक गीता राम ने बताया कि वह पिछले 15 साल से पारंपरिक नाव चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि पर्यटन गतिविधियां शुरू होने से उन्हें भी पर्यटकों को कम खर्च में सैर करवाने का अवसर मिल सकता है। इससे उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।
वहीं, बोट मालिक कांशी राम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कोल डैम में शिकारे चलाने की बात कही है। उन्होंने मांग की कि इसका लाभ किसी बड़ी जल पर्यटन कंपनी को देने के बजाय स्थानीय पुराने बोट मालिकों को लाइसेंस दिए जाएं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
पंजीकरण करवाकर जिला जल पर्यटन समिति के समक्ष रखें मांग
पर्यटन विभाग मंडी के उपनिदेशक रजनीश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने के साथ शिकारे चलाने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इसके लिए स्थानीय बोट मालिकों को पंजीकरण करवाकर जिला जल पर्यटन समिति के समक्ष अपनी मांग रखनी होगी। उन्होंने बताया कि शिकारे चलाने के लिए फाइबर बोट होना भी जरूरी है।