धर्मपुर (मंडी)। सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसानों की बेदखली पर रोक लगाए जाने के बावजूद मंडी जिला के कुछ राजस्व अधिकारियों द्वारा नोटिस जारी किए जाने का हिमाचल किसान सभा ने कड़ा विरोध किया है।
इसी के विरोध में हिमाचल किसान सभा 8 जनवरी को मंडी में एक अधिवेशन आयोजित करने जा रही है, जिसमें सभा के राज्य सचिव एवं पूर्व विधायक राकेश सिंघा विशेष रूप से भाग लेंगे।
अधिवेशन के बाद उपायुक्त मंडी को ज्ञापन सौंपकर कोर्ट के फैसले के अनुरूप यथास्थिति बनाए रखने की मांग की जाएगी। पूर्व जिला पार्षद एवं किसान सभा के प्रभारी भूपेंद्र सिंह, अध्यक्ष दिनेश काकू, दिलीप सिंह, कश्मीर सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि हिमाचल किसान सभा लंबे समय से किसानों के कब्जे वाली जमीन को उनके नाम नियमित करने, मकानों को तोड़ने पर रोक लगाने तथा बगीचों की कटाई न करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रही है।
इसी क्रम में शिमला में तीन बार प्रदर्शन किए जा चुके हैं और न्यायालय के माध्यम से भी कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। किसान सभा ने यह मांग भी दोहराई कि सभी भूमिहीन परिवारों को न्यूनतम पांच बीघा जमीन उपलब्ध करवाई जाए। इसके लिए केंद्र सरकार से वन संरक्षण कानून 1980 में संशोधन कर राज्यों को भूमि आवंटन का अधिकार देने की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि धर्मपुर सहित कई क्षेत्रों में बाढ़ के कारण दर्जनों परिवार भूमिहीन हो चुके हैं लेकिन कानूनी अड़चनों के चलते सरकार उन्हें कहीं भी जमीन नहीं दे पा रही है।
हिमाचल किसान सभा सरकार से मांग की है कि सरकारी भूमि पर लंबे समय से बने घरों को न तोड़ा जाए और जमीन पर किए गए कब्जों को नियमित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।