मंडी। मंडी शहर के ऐतिहासिक बाबा भूतनाथ मंदिर में महाशिरात्रि से पूर्व स्वयंभू शिवलिंग को एक माह तक माखन रूपी घृत कंबल से श्रृंगार किया जा रहा है। जिसमें रोजाना देशभर के विभिन्न शिव मंदिरों में स्थापित शिवरूपों को दिखाया जा जा रहा है। बुधवार को बाबा भूतनाथ के महंत स्वामी देवानंद सरस्वती ने घृत कंबल में सीकर राजस्थान के खाटू श्याम के रूप काे उकेरा। इसके दर्शनों के लिए सुबह से मंदिर में श्रद्धालुओं की भरी भीड़ लगी रही।
श्रद्धालुओं में खाटू श्याम मंदिर के प्रति भारी आस्था है। लोगों की आस्था का मुख्य केंद्र है। मान्यता है कि खाटू श्याम जी बाबा भूतनाथ स्वरूप भगवान कृष्ण के कलयुगी अवतार हैं। खाटू श्याम के रूप में प्रसिद्ध देवता असल में पांडवों में से भीम के पोते अर्थात घटोत्कच के बेटे हैं। जिनका असली नाम बर्बरीक है। उनमें बचपन से ही एक वीर योद्धा के गुण थे। महाभारत के युद्ध हिस्सा लेने के लिए बर्बरीक ने अपनी माता से आज्ञा मांगी। तब उनकी मां को यह आभास हुआ कि कौरवाें की सेना अधिक होने के कारण पांडवों को युद्ध में परेशानी हो सकती है। इस पर बर्बरीक की मां ने उन्हें आज्ञा देते हुए यह वचन लाया कि वह युद्ध हार रहे पक्ष साथ देंगे। तभी से खाटू श्याम हारे का सहारा कहलाने लगे। भगवान श्री कृष्ण जानते थे कि कौरवों को हारता देखकर बर्बरीक कौरवों का साथ देंगे। जिससे पांडवों का हारना तय है। तब भगवान कृष्ण ने ब्राह्मण का रूप बनाकर बर्बरीक से शीश दान में मांगा। इस पर बर्बरीक ने अपनी तलवार से भगवान के चरणों में अपना सिर अर्पित कर दिया। इसलिए उन्हें शीश का दानी कहा जाता है। उधर, बाबा भूतनाथ मठ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि घृत कंबल महाशिवरात्रि से एक माह पूर्व शुरू हुआ है। यह आयोजन महाशिवरात्रि तक चलेगा। रोजाना स्वयं भू शिवलिंग पर माखन से भगवान शिव के अनेक स्वरूपों को उकेरा जाता है।