महंगाई, ईंधन की कीमतों और ऋण की किस्तों के बीच पर्यटन कारोबार पर भी असर की आशंका
प्रदेश सरकार की ओर से बाहरी वाहनों पर लगाए गए प्रवेश कर के विरोध में वसूला जा रहा टैक्स
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। हिमाचल-पंजाब सीमा पर कुछ निहंग संगठनों की ओर से हिमाचल के वाहनों से लिए जा रहे कथित खालसा टैक्स को लेकर टैक्सी ऑपरेटरों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि परिवहन व्यवसाय पहले ही बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों, वाहन रखरखाव खर्च और ऋण की किस्तों के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
टैक्सी कारोबारियों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो इसका असर केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी वाहनों पर लगाए गए प्रवेश कर के विरोध में पंजाब सीमा पर कुछ निहंग संगठनों की ओर से वाहनों से राशि एकत्रित की जा रही है। संबंधित संगठन इसे जनसेवा से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन इसका सीधा प्रभाव सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही करने वाले वाहन चालकों पर पड़ रहा है।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि हिमाचल और पंजाब के बीच चल रहे इस विवाद का खामियाजा टैक्सी ऑपरेटरों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि उनका इस मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार और निहंग संगठनों के बीच चल रहे इस विवाद का सबसे अधिक प्रभाव टैक्सी ऑपरेटरों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। प्रदेश सरकार को इस मामले का शीघ्र और व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए, ताकि परिवहन क्षेत्र से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित न हो। -महेंद्र गुलेरिया, अध्यक्ष, मंडी टूरिज्म वेलफेयर सोसायटी
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प्रदेश सरकार को टैक्सी ऑपरेटरों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े परिवारों की स्थिति को देखते हुए जल्द समाधान निकालना चाहिए। हिमाचल और पंजाब के बीच आवागमन करने वाले वाहन चालकों को किसी भी प्रकार की असुविधा या अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना चाहिए। -योगेंद्र कुमार, प्रधान, मां बगलामुखी टैक्सी ऑपरेटर यूनियन, पंडोह
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टैक्सी किराये में कई वर्षों से बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि ईंधन, रखरखाव और ऋण की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में किसी भी अतिरिक्त कर या शुल्क का बोझ पड़ने से पर्यटकों की यात्रा महंगी हो सकती है। इसका प्रभाव हिमाचल और पंजाब दोनों राज्यों के पर्यटन कारोबार, होटल उद्योग, टैक्सी सेवाओं, रेस्तरां तथा स्थानीय व्यापार पर पड़ सकता है। -प्रवीन शर्मा, मीडिया प्रभारी, देवभूमि टैक्सी यूनियन, पड्डल मंडी