लकड़ी के रसोईघर में एलपीजी सिलेंडर बना टाइम बम, जरा सी चूक और सब राख
संवाद न्यूज एजेंसी
थुनाग (मंडी)। पहाड़ों की पहचान और ठंड से निजात दिलाने वाले पारंपरिक काष्ठकुणी शैली के मकान अब हादसों का सबब बनते जा रहे हैं। लकड़ी से बने इन खूबसूरत आशियानों के रसोईघर में रखा एलपीजी गैस सिलिंडर किसी टाइम बम या बारूद के ढेर से कम साबित नहीं हो रहा है। रविवार को बागाचनोगी में सामने आई गैस लीकेज और आग की घटना ने पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सराज क्षेत्र में अधिकांश घरों में रसोईघर सबसे ऊपरी मंजिल पर बना होता है। आमतौर पर लोग गैस के साथ-साथ लकड़ी का चूल्हा भी इस्तेमाल करते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड रहने के कारण पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल सालभर होता है। काठकुणी मकानों की दीवारें, फर्श और छतें पूरी तरह सूखी लकड़ी से बनी होती हैं। ऐसे में लकड़ी से बने बंद रसोईघर में थोड़ी-सी भी गैस लीक होने पर सूखी लकड़ी कुछ ही सेकंड में आग पकड़ सकती है।
यशवंत गैस एजेंसी, नेरचौक के मैनेजर रह चुके चतर सिंह ने बताया कि गैस लीक होने की स्थिति में सबसे पहले सिलिंडर का रेगुलेटर बंद करना चाहिए। घर के किसी भी स्विच, लाइट या पंखे को न तो ऑन करें और न ही ऑफ। छोटी-सी चिंगारी भी बड़ा धमाका कर सकती है। माचिस, मोमबत्ती, अगरबत्ती या लाइटर किसी भी सूरत में न जलाएं। रसोई और आसपास के कमरों की सभी खिड़कियां और दरवाजे तुरंत खोल दें, ताकि रसोई में जमा भारी गैस बाहर निकल सके। उन्होंने बताया कि रेगुलेटर हटाने के बाद यदि वाल्व से गैस का रिसाव हो रहा हो तो उस पर लाल रंग की प्लास्टिक सेफ्टी कैप कसकर लगा दें।