हाईकोर्ट के आदेशों पर भले ही प्रदेश में बलि प्रथा पर रोक लग गई है लेकिन सदियों से इस परंपरा को निभाने वाले देवता के गूर मानते हैं कि अगर उनके देवता क्रोधित हो उठे तो स्थिति पर काबू करना मुश्किल हो जाएगा।
पिछले वर्ष बड़ा देव कमरूनाग ने मंडी के शिवरात्रि मेले में पहली बार कोर्ट के आदेशों के चलते बिना बलि से शिरकत की थी, मगर मेले के बीच देवता अपने गण को बलि न मिलने से मेला कमेटी पर क्रोधित हो उठे थे।
जिससे प्रशासन और मेला कमेटी को अनेक बार टारना पहुंचकर देव कमरूनाग से माफी मांगनी पड़ी थी। कमरूनाग देवता के गूर लीलमणी ने बताया कि कोर्ट के आदेशों के चलते देव कमरूनाग के लिए पशु बलि की प्रथा पूर्ण रूप से बंद कर दी है।
बताया कि कमरूनाग देवता के साथ चलने वाले गण देवता से बलि की मांग करते हैं, जिसके कारण देवता अपने गणों को खुश करने के लिए ‘पूछ’ में पशु बलि की मांग उठाते हैं। पशु बलि के लिए गण रूठे तो इस बार भी शिवरात्रि मेले में पहुंचे बड़ा देव कमरूनाग प्रचंड हो सकते हैं।
रविवार को जनपद के अधिष्ठाता बड़ा देव कमरूनाग अपने देवलुओं समेत शिवरात्रि के कारज शुरू करने के लिए छोटी काशी पहुंच गए हैं। पिछले कई दशकों से देव कमरूनाग के लिए शिवरात्रि मेले के दौरान टारना मंदिर में बकरा बलि चढ़ाई जाती रही है लेकिन पिछले दो वर्षों से हाईकोर्ट के आदेश के चलते धार्मिक स्थलों में पशु बलि पर रोक लगा दी गई है।
जिससे शिवरात्रि मेले में देव कमरूनाग को गत वर्ष बलि नहीं दी जा सकी। यह दूसरा मौका है जब बड़ा देव कमरूनाग बिना बलि मंडी के शिवरात्रि मेले में शिरकत कर रहे हैं।