एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी करेगी नुकसान की भरपाई, पोर्टल की तकनीकी खराबी दूर
मंडी में 60 हजार हेक्टेयर से अधिक फसलों को मिलेगा सरकार की सब्सिडी का कवच
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मक्की और धान की फसल की बीमा प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है। तकनीकी कारण से बंद हुए पोर्टल से किसान अपनी फसलों का समय पर बीमा नही करवा पा रहे थे। मौसम के बदलते मिजाज और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम के बीच कृषि विभाग ने मंडी जिले के किसानों को बड़ी राहत दी है।
आपदाओं से होने वाले भारी नुकसान की शत-प्रतिशत क्षतिपूर्ति के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए सरकार ने सूचीबद्ध एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड का चयन किया गया है। किसानों को समय पर जागरूक करने के लिए उनके मोबाइल फोन पर योजना से संबंधित संदेश भेजे जा रहे हैं। जिले में मक्की और धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लगभग 42,000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की और 19,600 हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। दोनों फसलों के लिए कुल बीमित राशि 60,000 रुपये प्रति हेक्टेयर तय की गई है। योजना के तहत मक्की का कुल प्रीमियम 9 प्रतिशत 5,400 और धान का 20 प्रतिशत 12,000 रुपये है लेकिन किसानों को मात्र 2 प्रतिशत प्रीमियम 1,200 रुपये प्रति हेक्टेयर या 98 रुपये प्रति बीघा ही देना होगा।
शेष राशि सरकार सब्सिडी के रूप में वहन करेगी। गैर ऋणी किसान अपने राजस्व पत्र, पहचान पत्र, बैंक पासबुक और पटवारी की ओर से सत्यापित फसल बिजाई प्रमाण पत्र के साथ नजदीकी लोक मित्र केंद्र, बैंक शाखा या पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
बाक्स
फसलों की बीमा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों से आग्रह है कि वे समय पर अपनी फसलों का बीमा करवाकर अपनी मेहनत को सुरक्षित करें। -डॉ. रामचंद्र चौधरी, उपनिदेशक, कृषि विभाग मंडी।