बीमा कंपनी को ग्राहक को किसी और काम के बहाने बुलाकर फिर उसे कम प्रीमियम
पर ज्यादा रकम दिए जाने का लालच देकर धोखे से बीमा करना महंगा पड़ा। ऐसे ही
एक मामले में जिला उपभोक्ता फोरम मंडी के अध्यक्ष पुरेंद्र वैद्य ने
रिलांयस इंश्योरेंस कंपनी को बीमाकर्ता से लिए गए पांच हजार रुपये छह
प्रतिशत ब्याज सहित वापस लौटाने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता को हुए
परेशानी के बदले में तीन हजार रुपये हर्जाना तथा दो हजार रुपये शिकायत
खर्चा देने के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता नरेश कुमार गांव कनेर डाकघर
फतेपुर तहसील सरकाघाट जिला मंडी ने अपने वकील सतीश कौशल के माध्यम उपभोक्ता
फोरम में याचिका दायर की थी कि 25 अक्तूबर 2013 को उसके भाई को रिलायंस
कंपनी के प्रतिनिधि की ओर से एक मोबाइल कॉल आई कि आपके भतीजे को साइंस
क्विज प्रतियोगिता में विजेता घोषित किया गया है। लिहाजा आप अपना ईनाम लेने
हेतु जाहू हमीरपुर में उसे साथ लेकर आ जाएं। इस पर विनोद कुमार अपने भतीजे
को लेकर जाहू पहुंचा तो पता चला कि उसका कोई ईनाम नहीं निकला है अलबत्ता
वहां पर उसे रिलांयस कंपनी का प्रतिनिधि संजय कुमार मिला। उसने उसे रिलांयस
कपंनी की बीमा पॉलिसी लेने को बाध्य किया और उसी दिन शाम को वह उनके घर
पहुंच गया।
उसने बताया कि यदि वह रिलांयस की बीमा पॉलिसी लेते हैं और 7 साल
तक 25 हजार रुपये का सालाना प्रीमियम देते हैं तो आपको 14 साल के बाद 12
लाख रुपये मिलेंगे। इस पर विनोद कुमार ने भारतीय सेना में नौकरी कर रहे
अपने भाई से बात की तो उसने यह आकर्षक आफर देख कर रजामंदी दे दी। उसने
एजेंट को 25 हजार रुपये दे दिए और भतीजे का बीमा करवा लिया। जब उसे डाक से
पालिसी बांड आया तो उसमें उसने पाया कि उसे तो इसके बदले में 15 साल बाद
केवल 2.40 लाख रुपये ही मिलेंगे। इस पर शिकायतकर्ता ने उक्त एजेंट से अपने
25 हजार रुपये वापस मांगे जिस पर कंपनी ने पैसे देने से मना कर दिया। इस पर
शिकायतकर्ता ने अपने अधिवक्ता सतीश कौशल के माध्यम से उपभोक्ता फोरम में
शिकायत की। सारे तथ्य सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम मंडी के अध्यक्ष पुरेंद्र
वैद्य ने रिलांयस बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता नरेश कुमार
को 25 हजार रुपये 6 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाए व साथ में तीन हजार रुपये
हर्जाना और दो हजार रुपये मुकदमा खर्चा भी देने के आदेश दिए हैं।