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Mandi News: छत से पहले महंगाई खड़ी, आपदा प्रभावितों की जंग और कठिन

Wed, 07 Jan 2026 06:23 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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बालीचौकी (मंडी)। सरिया के साथ सीमेंट के दामों में हुई बढ़ोतरी ने आपदा प्रभावित परिवारों की चिंताएं और बढ़ा दी हैं। आपदा में सब कुछ गंवा चुके लोग सीमित आर्थिक सहायता के सहारे दोबारा जीवन शुरू करने की जद्दोजहद कर रहे हैं लेकिन निर्माण सामग्री के लगातार महंगे होने से उनका पूरा बजट डगमगा गया है। सरिया के दामों में प्रति क्विंटल करीब 500 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। वहीं सीमेंट के दाम बढ़ने से भी निर्माण लागत में इजाफा हो गया है।
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प्रशासन की ओर से आपदा प्रभावित परिवारों को पहली किस्त के रूप में कुछ को चार लाख रुपये और कुछ को 2.17 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। इसी राशि के आधार पर प्रभावितों ने सरिया, सीमेंट, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री का बजट तैयार किया था लेकिन अब सरिया और सीमेंट दोनों के दाम बढ़ने से यह गणना बिगड़ती नजर आ रही है। पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
प्रभावितों की मानें तो पहले प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ छीन लिया। अब जैसे कैसे सिर ढकाने के लिए छत बना रहे हैं तो महंगाई आड़े आने लग गई है। इससे मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसी तरह महंगाई बढ़ती गई तो घर बनाना मुश्किल हो जाएगा।
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सरिया के दाम में 500 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से 20 क्विंटल पर करीब दस हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यह पैसा मिस्त्री और मजदूरों की मजदूरी में जाना था लेकिन अब वही राशि सरिया और सीमेंट पर खर्च हो रही है। इससे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है।
-नारायण सिंह, आपदा प्रभावित

आपदा प्रभावित पहले से ही मजबूरी में जी रहे हैं। घर बनाने के लिए सरिया और सीमेंट सबसे जरूरी सामग्री है। दोनों के दाम बढ़ने से इसका सीधा असर आम जनता और खासकर आपदा प्रभावितों पर पड़ेगा। जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है, उन्हें हर हाल में निर्माण करना पड़ेगा लेकिन महंगाई उनकी राह में बड़ी बाधा बन रही है।
-केसर दास, प्रभावित

गांवों में लोग सामूहिक रूप से श्रमदान कर लेते हैं लेकिन सरिया और सीमेंट जैसी सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती है। ऐसे में जो आपदा प्रभावित चार कमरों का मकान बनाने की योजना बना रहे थे, उन्हें अब तीन कमरों तक ही सीमित होना पड़ेगा। सरिया और सीमेंट के बढ़ते दामों ने आपदा प्रभावितों के पुनर्वास की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है।
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-तिलक राज, प्रभावित
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