ओलावृष्टि से पारंपरिक फसलों के साथ सब्जियां भी बुरी तरह प्रभावित
सेब, बादाम, खुमानी, प्लम और आड़ू के पेड़ों पर लगे फल जमीन पर गिर गए
प्रभावित किसानों ने मुआवजे की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। करसोग क्षेत्र के पांगणा, मसोग और सुईं-कुफरीधार में मंगलवार दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली और ओलावृष्टि ने पूरे इलाके को सफेद चादर से ढक दिया। हालात ऐसे बन गए कि खेतों और बगीचों में ओलों की मोटी परत जम गई, जिससे किसानों और बागवानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया।
ओलावृष्टि के कारण पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नगदी फसलें और सब्जियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। सेब, बादाम, खुमानी, प्लम और आड़ू के पेड़ों पर लगे फल जमीन पर गिर गए, जबकि मटर और बींस की फसलें भी नष्ट हो गईं। वहीं आइसबर्ग, लेट्यूस, पार्सले, सेलेरी, लीक, जुकीनी, चाइनीज कैबेज और पोकचोय जैसी नाजुक पत्तेदार सब्जियां पूरी तरह नष्ट हो गईं। किसानों के अनुसार इन फसलों में अधिक लागत और गहन देखभाल लगती है, लेकिन कुछ ही मिनटों की ओलावृष्टि ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। महाकाली फल-सब्जी संघ मसोग के नानक चंद, जिला परिषद सदस्य चेतन गुलेरिया, गंगा राम, नरेश, परमार, नेत्र सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि ये फसलें उनकी आय का मुख्य स्रोत थीं, जो अब लगभग पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं।
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन किया जाए और उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही उन्होंने भविष्य में फसल बीमा व्यवस्था को मजबूत करने और ओलावृष्टि से बचाव के प्रभावी उपाय लागू करने की अपील की है, ताकि किसानों को इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से राहत मिल सके।
इस संबंध में जिला कृषि उप निदेशक रामचंद्र ने बताया कि गेहूं और नगदी सब्जियों पर सामान्य बारिश का विशेष असर नहीं होता है, लेकिन यदि लगातार बारिश होती है तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
करसोग क्षेत्र के पांगणा में हुई ओलावृष्टि के बाद जमीन पर जमी सफेद परत। स्रोत जागरूक पाठक