भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के वैज्ञानिक एक ऐसी क्रांतिकारी क्वांटम माइक्रोस्कोपी तकनीक विकसित करने की दिशा में अग्रसर हैं, जो भविष्य में शरीर की कोशिकाओं और गहरे ऊतकों की स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए तेज रोशनी की आवश्यकता को समाप्त कर देगी। इस नई तकनीक से कम रोशनी में भी उच्च गुणवत्ता वाली इमेज प्राप्त की जा सकेगी, जिससे कोशिकाओं को होने वाले नुकसान में कमी आएगी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के अध्ययन, शुरुआती पहचान व चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।
नई तकनीक: क्वांटम माइक्रोस्कोपी
वर्तमान माइक्रोस्कोपी तकनीकों में, स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त करने के लिए अधिक रोशनी का उपयोग किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप जीवित कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित की जा रही क्वांटम आधारित माइक्रोस्कोपी तकनीक में, प्रकाश के क्वांटम शोर को कम करने के लिए "स्क्वीज्ड लाइट" का उपयोग किया जाएगा। इससे कम रोशनी में भी अधिक स्पष्ट और विस्तृत इमेज प्राप्त की जा सकेगी।
परियोजना का विवरण और लक्ष्य
भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने इस तीन वर्षीय परियोजना को 17 अप्रैल 2026 को 1.80 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस परियोजना का नेतृत्व प्रधान अन्वेषक डॉ. अमित दत्तात्रय लाड कर रहे हैं, जिनके साथ डॉ. सुमित मुराब, डॉ. संजीव नारा और डॉ. जसकरण सिंह निरंकारी सह-अनुसंधानकर्ता के रूप में जुड़े हैं।
इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य तीन वर्षों के भीतर एक कार्यशील शोध प्रोटोटाइप तैयार करना है। शोध प्रक्रिया के प्रारंभिक चरण में, नियंत्रित प्रयोगशाला नमूनों और कृत्रिम ऊतक मॉडलों पर तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद, 3डी बायोप्रिंटेड ऊतकों और जीवित कोशिकाओं पर इसका मूल्यांकन किया जाएगा।
शोधकर्ताओं का दृष्टिकोण
डॉ. अमित दत्तात्रय, प्रधान अन्वेषक, सेंटर फॉर क्वांटम साइंस एंड टेक्नोलॉजीज, आईआईटी मंडी के अनुसार, "जीवित कोशिकाओं की इमेजिंग में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिक जानकारी के लिए अधिक रोशनी का उपयोग करना पड़ता है, जिससे कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। हमारा प्रयास रोशनी की मात्रा बढ़ाने के बजाय उसकी क्वांटम गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।" उन्होंने आगे कहा कि यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो यह भविष्य में संवेदनशील जैविक शोध और चिकित्सा इमेजिंग के लिए नए रास्ते खोलेगी।
गंभीर बीमारियों की पहचान में सहायक
इस तकनीक के सफल विकास से कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों के अध्ययन और शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है। यह चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है, जिससे रोगियों के निदान और उपचार में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी।