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तेंदुए से नजरें मिलीं डरा नहीं, डरा होता तो मर जाता : दीनानाथ

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बैहना (मंडी)। तेंदुआ जब सुबह गोशाला जाती बार अचानक सामने आया तो उससे नजरें मिलीं, लेकिन डरा नहीं। डरा होता तो तेंदुआ मुझे मार डालता। परिवार हिम्मत हार जाता तो शायद जिंदा न रहते। तेंदुए के हमले में घायल भडयाल पंचायत के हलौड़ निवासी दीनानाथ नेरचौक मेडिकल कॉलेज से स्वस्थ होने के बाद शनिवार देर शाम घर लौट आए हैं।
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बीते बुधवार को तेंदुए के हमले से दीनानाथ बुरी तरह घायल हो गए थे। दीनानाथ ने बताया कि घटना के दिन सुबह 7 बजे जब वह रोजाना की तरह गोशाला में पशुओं को चारा डालने जा रहे थे, तो अचानक उनके सामने तेंदुआ आ गया। तेंदुए से नजरें मिली लेकिन साहस करते हुए वह डरे नहीं, तेंदुए ने हमला कर हाथ को जबड़े में दबा लिया।
साहस दिखाते हुए तेंदुए के जबड़े से हाथ छुड़ाया लेकिन नुकीले दांत लगने से हाथ जख्मी हो गया। शोर सुनने ही पत्नी और बेटा भी वहां पहुंच गए। दीनानाथ की पत्नी रेखा ने बताया कि पति को तेंदुए की गिरफ्त में देख कर उसे कुछ समझ नहीं आया। ऐसे में जमीन पर पड़े पत्थरों से तेंदुए पर हमला बोल दिया। इस दौरान बेटे को भी आवाज लगाई। तेंदुए ने पति को छोड़कर मेरी टांगों पर पंजे से वार कर लहूलुहान कर दिया। बेटा जलती हुई लकड़ी लेकर पहुंचा और तेंदुए पर वार किए। दीनानाथ के बेटे ऋषभ ने बताया कि जब मम्मी-पापा को तेंदुए से घिरा देखा तो मन में एक ही ख्याल आया कि इन्हें कैसे बचाया जाए, ऐसे में घर के आंगन में जलाए चूल्हे से जलती लकड़ी उठाकर तेंदुए के मुंह पर वार किए। इसके बाद तेंदुआ वहां से भाग गया। परिजनों ने बताया कि अगर परिवार हिम्मत हार जाता तो शायद आज जिंदा न होते। संवाद
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