मंडी। पत्नी के ससुराल लौटने की इच्छा के बावजूद पति का उसे वापस न ले जाना मानसिक क्रूरता और परिस्थितियों के अनुसार घरेलू हिंसा की श्रेणी में आ सकता है। मंडी के सत्र न्यायाधीश की अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में पति की अपील खारिज कर दी। साथ ही न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-दो मंडी के 18 नवंबर 2025 के आदेश को बरकरार रखा।
कोटली क्षेत्र की महिला ने पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला दायर किया था। दोनों का विवाह 30 अप्रैल 2018 को हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। महिला का आरोप था कि शादी के कुछ समय बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और कार व सोने की मांग की गई। ताने मारने और अपमानित करने के आरोप भी लगाए गए थे।
सुनवाई के दौरान महिला ने अदालत में कहा कि वह पति के साथ रहना चाहती है और ससुराल लौटने को तैयार है। पंचायत में भी उसने वापस ससुराल जाने की इच्छा जताई थी लेकिन पति की ओर से उसे वापस रखने की इच्छा नहीं दिखाई गई। वहीं, पति ने बताया कि उसने दिसंबर 2024 में पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की है।
अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा सिर्फ शारीरिक मारपीट तक सीमित नहीं है। मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक प्रताड़ना भी इसके दायरे में आती है। महिला और उसके दोनों बच्चों का मायके में रहना स्थायी समाधान नहीं है। पत्नी को साझा घर में रहने का वैधानिक अधिकार है। यदि वहां रहने की सुविधा नहीं मिलती है तो उपयुक्त आवास के किराये की व्यवस्था की जा सकती है।