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HPTEB: तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने 15 ट्रेडों में डिप्लोमा कोर्स के लिए मांगे आवेदन, जानें अंतिम तिथि

Tue, 07 Apr 2026 06:24 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।

सार

तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने 15 ट्रेडों में डिप्लोमा कोर्स करवाने के लिए आवेदन मांगे हैं। यह आवेदन प्रदेशभर में चल रहे 17 सरकारी और आठ निजी बहुतकनीकी संस्थानों के लिए मांगे गए हैं। 
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हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने 15 ट्रेडों में डिप्लोमा कोर्स करवाने के लिए आवेदन मांगे हैं। यह आवेदन प्रदेशभर में चल रहे 17 सरकारी और आठ निजी बहुतकनीकी संस्थानों के लिए मांगे गए हैं। बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा (पैट) के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 5 मई, जबकि दो वर्षीय डिप्लोमा (लीट) के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 6 मई रखी गई है। इन कोर्सों के लिए यह आवेदन ऑनलाइन माध्यम से भरे जाएंगे। इस संदर्भ में सारी जानकारी तकनीकी शिक्षा बोर्ड की ओर से जारी प्रोस्पेक्टस पर उपलब्ध करवाई गई है।

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डिप्लोमा स्तर पर इंजीनियरिंग और गैर इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के लिए इस समय 17 राजकीय बहुतकनीकी संस्थान, एक एमएसएमई टेक्नोलॉजी केंद्र और 8 निजी बहुतकनीकी संस्थान संचालित हो रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए कुछ संस्थानों में द्वितीय शिफ्ट में भी कक्षाएं चलाई जा रही हैं, जिससे अधिक विद्यार्थियों को अवसर मिल सके। डिप्लोमा फार्मेसी की पढ़ाई के लिए प्रदेश में 2 सरकारी और 19 निजी संस्थान प्रशिक्षण उपलब्ध हैं। तकनीकी शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों में कुल 15 ट्रेड शामिल हैं।
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इनमें सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इंस्ट्रूमेंटेशन, आर्किटेक्चर असिस्टेंटशिप, फूड टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (एआई एवं मशीन लर्निंग), एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग और मैकेनिकल (टूल एंड डाई) जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। अधिकांश डिप्लोमा कोर्स सेमेस्टर प्रणाली के तहत तीन वर्ष की अवधि के हैं, जबकि डिप्लोमा फार्मेसी को वार्षिक प्रणाली के अंतर्गत दो वर्ष का रखा गया है। तकनीकी शिक्षा बोर्ड के सचिव अशोक पाठक का कहना है कि कोर्सों के संबंध में पूरी जानकारी प्रोस्पेक्ट पर उपलब्ध करवाई गई है। इन पाठ्यक्रमों से युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी और वे उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल कर सकेंगे। इससे न केवल प्रदेश में तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, बल्कि स्वरोजगार और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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