सोशल मीडिया पर उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस की विचारधारा के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1977 में कांग्रेस के कठिन दौर में, जब प्रदेश में पार्टी का कार्यालय तक नहीं था, तब उनके पिता वीरभद्र सिंह ने अपने निजी निवास ‘हॉली लॉज’ से पार्टी को मजबूती दी। ऐसे में उन्हें अपनी निष्ठा साबित करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल और मंडी के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और केंद्र से राज्य का हक दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह का प्रशासनिक अनुभव आज भी प्रदेश के लिए मार्गदर्शक है। वरिष्ठ नेता कौल सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उन्होंने कहा कि इन्हें मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के संज्ञान में लाया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।