सराज घाटी के देजी गांव के कर्शवाली राहत शिविर में खाना खाते प्रभावित। संवाद
गोहर (मंडी)। जहां सावन के महीने में सराज घाटी मेलों और धार्मिक आयोजनों से गुलजार रहती थी, वहां इस बार बेबसी और सन्नाटा पसरा है। थुनाग, जंजैहली, बगस्याड़ जैसे इलाकों में इस बार मेलों की कोई तैयारी नहीं हुई। बाढ़ और भारी बारिश को 23 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात अब तक सामान्य नहीं हो पाए हैं।
सुरागी, थुनाग, झाजर, खेलधार और सुनाह समेत कई क्षेत्रों में मिट्टी धंसने और चट्टानों के गिरने से अस्थायी मार्ग बार-बार बंद हो रहे हैं। प्रभावित लोग राहत शिविरों में जिंदगी की जद्दोजहद में फंसे हुए हैं। खाने-पीने, सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। भूस्खलन से कई मकान खिसकने के कगार पर हैं।
कई परिवार अपने ही घरों से विस्थापित होकर रिश्तेदारों या राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं। बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेती और बागवानी पूरी तरह ठप हो चुकी है। प्रशासनिक टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रहे भूस्खलन से पुनर्वास कार्य बार-बार रुक रहा है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो उनका जीवन लंबे समय तक प्रभावित रहेगा।