छम नृत्य में गुरु पद्मसंभव के रूपों की प्रस्तुति से दिया आध्यात्मिक संदेश
छम नृत्य देख देश-विदेश के लोगों ने कमाया पुण्य, मंत्र जाप करते नजर आए
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिवालसर (मंडी)। तीन धर्मों की संगम स्थली रिवालसर में राज्यस्तरीय छेश्चू मेले के दौरान वीरवार को छम नृत्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। गुरु पद्मसंभव जयंती पर आयोजित इस मेले में बौद्ध अनुयायी बड़ी संख्या में पहुंचे और छम नृत्य को श्रद्धा के साथ देख पुण्य कमाया। छम नृत्य के बाद वीरवार को गुरु पद्मसंभव की शोभा यात्रा झील परिसर में निकाली गई, इसमें हजारों बौद्ध श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस दौरान बौद्ध मंत्रों से इलाका गुंजायमान हो गया।
छम नृत्य में बौद्ध अनुयायी देवताओं, राक्षसों और कंकालों के रंगीन मुखौटे पहनकर तथा विभिन्न रूप धारण कर गोलाकार घेरे में इस नृत्य को प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति पारंपरिक वाद्ययंत्रों और धार्मिक विधि-विधान के बीच संपन्न हुई। मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं ने छम नृत्य को आस्था और श्रद्धा के साथ देखा। लाहौल-स्पीति से आए बौद्ध अनुयायी मंगल सिंह खाम्पा ने बताया कि रिवालसर स्थित बौद्ध मंदिर में गुरु पद्मसंभव आज भी जागृत रूप में विराजमान हैं। इसलिए यहां आना हर बार एक नई उर्जा मिलने जैसा होता है। बौद्ध अनुयायी इस दौरान लगातार मंत्र जाप और दीये जलाकर आराधना करते हुए नजर आते हैं।
न्यिंगमापा बौद्ध मंदिर समिति के उपाध्यक्ष लेख राम नेगी और बौद्ध भिक्षु फ्रबु तेंजिन ने बताया कि छम नृत्य के माध्यम से गुरु पद्मसंभव के विभिन्न स्वरूपों का प्रदर्शन किया गया। इस नृत्य के जरिये बुरी शक्तियों को दूर भगाने, सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने और मृत्यु के बाद आत्मा को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने का संदेश दिया गया। वहीं, एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी ने बताया कि राज्य स्तरीय छेश्चू मेले का स्वरूप धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।
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तीन धर्मों के लोग भाईचारे और सौहार्द के साथ पेश कर रहे मिसाल
रिवालसर में बौद्ध धर्म के अलावा हिंदू और सिख धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं। यहां लोमश ऋषि और सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने भी तपस्या की थी। यहां तीनों धर्मों के लोग आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ रहते हैं।