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मिड-डे मील वर्कर को 12 महीने का मानदेय दे सरकार : भूपेंद्र

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कामरेड तारा चंद भवन में आयोजित बैठक में मिड डे मील वर्कर।  स्त्रोत संगठन
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मंडी। सीटू के प्रधान भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में केंद्र सरकार ने पिछले पंद्रह साल से एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की है। केंद्र सरकार केवल एक हजार रुपये ही दे रही है लेकिन हिमाचल सरकार से इन्हें चार हजार रुपये दिए जाते हैं। इससे साफ होता है कि केंद्र सरकार मिड-डे मील वर्करों के पक्ष में कोई काम नहीं कर रही है। केंद्र सरकार ने 25 बच्चों की शर्त लगाकर बीस साल से काम कर रहे वर्करों को अब निकाला जा रहा है।
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सीटू से संबंधित मिड-डे मील वर्करज यूनियन मंडी जिला कमेटी की बैठक कॉमरेड तारा चंद भवन में जिला प्रधान बिमला देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें सीटू के प्रधान भूपेंद्र सिंह, उपप्रधान गुरदास वर्मा, महासचिव राजेश शर्मा आदि ने भाग लिया। बैठक में मिड-डे मिल वर्करों को साल में बारह महीनों में से केवल दस महीनों का मानदेय देने और किसी प्रकार की भी छुट्टियां न देने के लिए हिमाचल सरकार की नीति का विरोध किया। यूनियन की मांग है कि वर्करों को हर महीने की 5 तारीख से पहले मानदेय दिया जाए। उन्हें पे स्लिप भी जारी की जाए।
प्रस्ताव पारित किया गया कि सरकार की ओर से बंद या मर्ज किए जा रहे स्कूलों की स्थिति में उन्हें विभाग में दूसरे पदों पर लगाया जाए। इसके लिए नीति बनाई जाए। जिन वर्करों को स्कूल मर्ज होने पर दूसरे स्कूलों में भेजा गया है उन्हें केवल साढ़े तीन हजार रुपये ही मिल रहे हैं जबकि दूसरे स्कूलों में काम कर रहे वर्करों को पांच हजार रुपये मासिक मिल रहे हैं। इन वर्करों को विभागीय कर्मचारी बनाया जाए और उन्हें सरकार का न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। इन सब मांगों के लिए यूनियन उपदेशक और निदेशक को ज्ञापन सौंपेगी। 26 नवंबर को उपमंडल स्तर पर धरने-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। बैठक में राणो देवी, रीना देवी, निशा देवी, चंद्रावती, अंजना, सोमा, देवेंद्र, आशा आदि मौजूद रहे। संवाद
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