पति के निधन के बाद लिफाफे बनाकर और मेहनत-मजदूरी से संभाला घर, बेटा आज आईटीआई प्रशिक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। कहते हैं कि हिम्मत और जिद हो तो बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी पार किया जा सकता है। मंडी शहर के रविनगर निवासी मंथरा ने इस बात को सच कर दिखाया है। पति के निधन के बाद उन्होंने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए अखबार के लिफाफे बनाना और लोगों के घरों में काम करना शुरू किया।
करीब छह वर्ष पहले पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पांचवीं पास मंथरा ने रद्दी से लिफाफे बनाने का काम शुरू किया। वे बाजार से 20-30 रुपये प्रति किलो रद्दी खरीदकर लिफाफे बनाती थीं और उन्हें दुकानों में 35-40 रुपये प्रति सौ के बंडल के हिसाब से बेचकर गुजारा करती हैं।
पहले उन्हें दुकानदारों से खास सहयोग नहीं मिला, लेकिन पॉलिथीन पर प्रतिबंध के बाद उनके बनाए लिफाफों की मांग बढ़ गई। मंथरा रोजाना 3-4 बंडल लिफाफे तैयार कर बेचती हैं और जरूरत पड़ने पर घरों में काम भी करती हैं।
इसी संघर्ष के बीच उन्होंने अपने बेटे को आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में प्रशिक्षण दिलाया। आज उनका बेटा एक निजी संस्थान में कार्यरत है। मंथरा का कहना है कि अब बेटा भी कमाने लगा है, जिससे घर का गुजारा बेहतर तरीके से चल रहा है।