मंडी। फोरलेन से जुड़ने के बाद जिले में होम स्टे एक रोजगार का साधन बनने लगा है। पर्यटकों की सुविधा के लिए नए होम स्टे का पंजीकरण तेजी से हो रहा है।
एक साल में जिले में 120 नए होम स्टे का पंजीकरण किया गया है। अब होम स्टे का आंकड़ा बढ़ कर 276 तक पहुंच गया है। पंजीकरण का क्रम जारी है। मंडी जिले में सराज, करसोग और चौहारघाटी की मनोरम वादियों को निहारने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते है। कुल्लू-मनाली की तरफ आवागमन करने के साथ-साथ पिछले कुछ समय से जिले की इन वादियों में भी पर्यटकों की चहलकदमी बढ़ी है। इसके पीछे दुर्गम क्षेत्रों में होम स्टे की सुविधा बड़ा कारण है। पर्यटक अब उन अनछुए स्थलों तक भी पहुंचने लगे हैं जो पर्यटन के मानचित्र पर अभी उभरे ही नहीं हैं।
नाचन के सरोआ में जालपा मंदिर, सराज क्षेत्र के शैटाधार, बूढ़ा केदार, देवीदहड़ तथा करसोग के पांगणा समेत अन्य स्थलों की तरफ भी पर्यटकों की पहुंच हो रही है। मंडी में करीब एक साल पहले पर्यटन विभाग के पास होम स्टे का आंकड़ा 156 के आस पास था। जब से किरतपुर-मनाली फोरलेन से वाहनों में पर्यटक पहुंच रहे है तब से होम स्टे के पंजीकरण में तेजी आई है। 120 नए होम स्टे का पंजीकरण इस अवधि में विभाग ने किया है। फोरलेन किनारे ढाबे और होम स्टे रोजगार का साधन बन कर उभरे हैं।
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अधिक से अधिक चार कमरे
होम स्टे का संचालन करने के लिए पर्यटन विभाग ने अधिक से अधिक चार कमरों का होना जरूरी किया है। संचालक को भी उसी घर में रह कर पर्यटकों को घर का भोजन परोसना होता है। घरेलू दरों पर बिजली की आपूर्ति का प्रावधान है। होम स्टे का पंजीकरण पांच साल के लिए किया जाता है। इसके बाद महज 100 रुपये में दोबारा पंजीकरण का प्रावधान है।
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सड़कों का जाल बिछने के बाद होम स्टे के पंजीकरण बढ़ रहे है। होम स्टे के सही क्रियान्वयन के लिए समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। इस दौरान ठोस कूड़ा-कचरा प्रबंधन, मानव मल-मूत्र के सही प्रबंधन, स्वच्छता समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जाती है। होम स्टे में पर्यटक पांच सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक रात्रि ठहराव कर सकते हैं। किराया होम स्टे में उपलब्ध करवाई गई सुविधाओं के अनुसार कम और अधिक होता है।
-मनोज कुमार, जिला पर्यटन अधिकारी, मंडी
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