सैंकड़ों बेजुबान पक्षियों के घोंसले-झुलसने की आशंका
ब्रीडिंग सीजन में सबसे ज्यादा खतरा
हेम सिंह ठाकुर
थुनाग (मंडी)। सराज के जंगलों में एक के बाद एक लगातार हो रही आग की घटनाओं से वन्य जीव संकट में पड़ रहे हैं। शैटाधार, छतरी और अब राणाबाग में आग की तीसरी घटना ने वन्य जीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है। दस दिनों के भीतर सराज के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 20 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ गया है, जिसमें हजारों छोटे बड़े पेड़ पौधे जल चुके हैं।
सराज के जंगलों में लगी भीषण आग अब न केवल वन संपदा को नष्ट कर रही है, बल्कि असंख्य पशु-पक्षियों की जान पर भी बन आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च से जून तक का समय पक्षियों का ब्रीडिंग सीजन होता है। इस दौरान वे घोंसले बनाते हैं, अंडे देते हैं और चूजों की देखभाल करते हैं। जंगल की आग सबसे ज्यादा इन्हीं मासूम प्राणियों पर मार डालती है।
सराज के जंगलों में यहां की प्रमुख पक्षी प्रजातियों में मोनाल, कोकलास फेजेंट, वेस्टर्न ट्रागोपन, ब्लू व्हिसलिंग-थ्रश, ग्रेट बारबेट, जंगली मुर्गे, कुलस, घुघी और चकोर जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं। जो आजकल प्रजनन करती हैं। इसके अलावा तेंदुआ, बंदर, कक्कड़, घोरल जैसे स्तनधारी पशु पाए जाते हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र सिंह बताते हैं कि ब्रीडिंग के दौरान पक्षी घोंसलों से दूर नहीं जा पाते, जिससे वे आग में फंस जाते हैं। इससे न केवल वर्तमान पीढ़ी प्रभावित होती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी खतरे में पड़ जाती हैं। कई प्रजातियां विलुप्त की कगार पर पहुंच सकती हैं। स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की टीम आग बुझाने में जुटी है, लेकिन ढांक क्षेत्र होने से चुनौती बढ़ गई है।
उधर, डीएफओ वाइल्ड लाइफ राजेश कुमार ने बताया कि जंगलों की आग का सबसे बुरा असर वहां रहने वाले वन्यजीवों पर पड़ता है। लोगों को जंगलों में आग लगाने से बचना चाहिए। यह एक जघन्य पाप है। इससे पारिस्थितिक संतुलन डगमगा जाता है।