थुनाग (मंडी)। सूखे और पतझड़ के कारण आग के लिए जंगल संवेदनशील हो गए हैं। वन मंडल नाचन के अधिकारियों ने जंगलों और उससे सटी आबादी को आग से बचाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब क्षेत्र के जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। थुनाग क्षेत्र में दो महीने में ही आग की पांच घटनाएं सामने आई हैं। इसमें लाखों की वन संपदा राख हुई है।
सराज में ऐसे कई घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं, जोकि जंगलों से सटे हुए हैं। इन क्षेत्रों मं आग का खतरा ज्यादा रहता है। वन विभाग ने घनी आबादी से सटे वन क्षेत्र में स्टाफ को सतर्क रहने को कहा गया है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों का सहयोग भी लिया जा रहा है। आग की सूचना के लिए फायर अलर्ट सिस्टम पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है।
साथ ही संवेदनशील एरिया में वन विभाग का स्टाफ भी मौके पर तैयार रहता है ताकि इन जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके। सराज में हुई आग घटनाएं छोटे स्तर की थीं। ऐसे में इन पर समय रहते आग पर काबू पा लिया गया है। किसी तरह के बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं है। फायर सबस्टेशन थुनाग के लीडिंग फायरमैन मायाधर ने बताया कि जंगल सड़क मार्ग से दूर होते हैं जहां गाड़ियां नहीं पहुंच पाती हैं। ग्रामीणों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी ताकि जंगलों को बचाया जा सके।
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वनों में आग लगने के दो प्रमुख कारण हैं। एक प्राकृतिक और दूसरा मानवीय। लंबा सूखा और पतझड़ होने की वजह से जंगलों में फैली पत्तियां भी ग्राउंड फायर का कारण बनती हैं। लोगों में ऐसी अवधारणा है कि पत्तियों को जलाने से अच्छी घास निकलती है। इस कारण लोग खुद भी पत्तियों को आग लगा देते हैं। यह अपराध है। अगर कोई व्यक्ति जंगल में आग लगाते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
-सुरेंद्र कश्यप, डीएफओ नाचन