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Mandi News: बल्ह में टमाटर की पनीरी देने में जुटे किसान

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बल्ह घाटी में टमाटर की पनीरी के​ लिए लगाए गए बांस के डंडे। संवाद - फोटो : संवाद
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नेरचौक (मंडी)। उत्तरी भारत को टमाटर की आपूर्ति करने वाले बल्ह घाटी के किसान खेतों में जुट गए हैं। खेतों की जोताई करने के साथ-साथ किसान पनीरी तैयार करने में लगे हैं। बेरोजगार युवाओं के साथ-साथ नौकरी पेशा लोग भी टमाटर की खेती में मशगूल हैं।
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मिनी पंजाब के नाम से मशहूर बल्ह घाटी में हर साल करोड़ों रुपयों का टमाटर होता है। 10 से 12 हजार रुपये प्रति बीघा जमीन किराये पर लेकर बेरोजगार युवा टमाटर की खेती करते हैं। बल्ह घाटी के जलाह ढाबण से लेकर बैहना भडयाल तक दोनों किनारे पर एक हजार हेक्टेयर से अधिक भूभाग पर टमाटर की खेती की जाती है।

करीब चार माह की अवधि में घाटी के किसान पांच सौ करोड़ से अधिक का टमाटर का कारोबार करते हैं। सकाटा, लाल सोना, अंसल, अभिमन्यु, गोल्डन कलर्स रॉयल समेत विभिन्न प्रजाति के टमाटर किसान पैदा करते हैं।
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इन दिनों किसानों ने खेतों की ट्रैक्टर से जोताई का कार्य कर टमाटर की पौध को सहारा देने के लिए बांस के डंडे लगाने का कार्य भी शुरू कर दिया है। बल्ह घाटी के नलसर क्षेत्र के प्रगतिशील किसान तेज सिंह ठाकुर, मनी राम, प्रभात कुमार, भोला राम, संजय सैनी, रमेश कुमार आदि ने बताया कि जिले के सरकाघाट तथा हमीरपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बांस की मांग पूरी की गई है।

इन दिनों पनीरी तैयार करने का कार्य चल रहा है। आगामी 15 से 20 दिनों में पनीरी तैयार हो कर पौध को खेतों में लगाने का कार्य शुरू हो जाएगा। जुलाई में टमाटर तैयार होगा। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर के अलावा मध्य प्रदेश तक सप्लाई की जाती है। इंजीनियर, एमबीए कर चुके बल्ह के युवा भी टमाटर की नकदी फसल से रोजगार पा रहे हैं। नागचला के राकेश ठाकुर उर्फ गंगा, भंगरोटू के धनदेव ठाकुर, नेरचौक से मार्केटिंग हेड राजकुमार और नेरचौक सब्जी मंडी के अध्यक्ष डिंपल सैनी जैसे पढ़े-लिखे युवा टमाटर की खेती से मुनाफा कमा रहे हैं।
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बल्ह घाटी में एक हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में टमाटर की खेती की जाती है। किसानों से आग्रह है कि वे घातक रसायन का कम से कम प्रयोग कर ऑर्गेनिक खेती की तरफ अधिक ध्यान दें।-धर्म सिंह चौहान, कृषि विशेषज्ञ
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