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आस्था : देवताओं पर भारी पड़ी डायनें, आपदा का रहेगा प्रभाव

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मंडी के सेहली ​स्थित माता बगलामुखी मंदिर में आयोजित वार्षिक जाग में खेलते गुर अमरजीत शर्मा। संव
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कोटली (मंडी)। तुंगल क्षेत्र के सेहली गांव स्थित माता बगलामुखी मंदिर में बुधवार रात्रि वार्षिक जाग का आयोजन किया गया। विशेष पूजा-अर्चना के साथ अग्नि भजन मंडली साईगलू, नंदलाल मंडली और शर्मा भजन मंडली सेहली के कलाकारों ने रातभर मंदिर में महामाई का गुणगान किया। कलाकारों ने आज मेरी मैया ने औणा है, जय देवा कमरुनागा हो, ऊंचेया पहाड़ा लाया डेरा ओ शेरांवालिए आदि भजनों से गुणगान किया।
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मंदिर कमेटी के पुजारी अमरजीत शर्मा ने बताया कि रात्रि 12 बजे विशेष पूजा-अर्चना के साथ जाग शुरू हुई। दावा किया गया कि माता ने अपने गूर, पुजारी के माध्यम से देवताओं और डायनों के बीच हुए युद्ध का वृतांत सुनाया। भविष्य में डायनों के छलावे में आए लोगों के बारे में जानकारी देकर समाधान भी बताया।
पहला युद्ध बंगाल की खाड़ी स्थित समुद्र के टापू पर हुआ। इसी क्रम में अन्य युद्ध अलग-अलग स्थानों पर लड़े गए। अंतिम युद्ध मंडी जिले के घोघड़ धार स्थान पर हुआ। सात बार के युद्ध में तीन बार देवता, तीन बार ही डायनों की जीत हुई। अंतिम युद्ध में डायने शिख-पाथा लेकर भाग गईं, जिस कारण इस वर्ष डायनों को विजयी माना गया। किंवदंती है कि डायनों की जीत से जन मानस को आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है।
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गूर पुजारी के माध्यम से माता ने श्रद्धालुओं को रक्षा का आश्वासन दिया। चेताया कि मनुष्य प्रकृति और देव नीति से छेड़छाड़ कर रहा है, जिससे ये आपदाएं बढ़ रही हैं। अब भी नहीं संभले तो भविष्य में भयावह परिणाम भुगतने होंगे। देव स्थलों को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है, जो देव नीति के विरुद्ध है। देवता शांत, स्वच्छ और पवित्र स्थानों में वास करते हैं। संवाद
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