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Mandi News: जागरूकता और धरपकड़ पर जोर, चिट्टा की लत में फंसे बच्चों इलाज का नहीं शोर

Thu, 13 Feb 2025 12:34 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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ग्रामीण भी युवाओं को पकड़कर पुलिस के हवाले कर रहे, नशा निवारण या परामर्शदाता के पास नहीं भेज रहे
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केपी पांजला
मंडी। जिला में चिट्टे में संलिप्त युवाओं के मक्कड़जाल को तोड़ने के लिए ग्रामीणों की एकजुट होकर काम करने की मुहिम अच्छी है, लेकिन उन्हें मुख्यधारा में लाने का यह समाधान नहीं है। जिला प्रशासन पंचायतों में जागरूकता शिविर तो लगा रहा है, लेकिन अभिभावकों और लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा कि चिट्टे में संलिप्त बच्चे का कहां पर इलाज करवा सकते हैं।
बल्ह, धर्मपुर, सराज, सदर मंडी और सुंदरनगर में ग्रामीण चिट्टे में संलिप्त युवाओं को पकड़ तो रहे हैं, लेकिन उन्हें पुलिस को सौंपकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जोनल और खंड स्तरीय अस्पताल में परामर्शदाता और इलाज की व्यवस्था तो है, लेकिन इसकी गिरफ्त में फंसे युवा बेहद कम पहुंच रहे हैं। नेरचौक मेडिकल कॉलेज में तैनात परामर्शदाता मार्च माह तक छुट्टी पर हैं।
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जिला मुख्यालय के समीप रघुनाथ का पधर में एक आदर्श नवा निवारण केंद्र है। जहां नशे की गर्त में फंसे युवाओं को इससे बाहर निकाला जा सकता है। यहां अभी तक करीब 200 से अधिक लोग नशा छोड़ चुके हैं। हालात यह हैं कि लोगों के जहन में यह नशा निवारण केंद्र भी नहीं है। जबकि यहां उपचार पूरी तरह से निशुल्क है।
जिले में नशे को लेकर जागरूकता और पकड़ने का कार्य तो जोरों पर है लेकिन चिट्टे के इलाज का शोर गायब है। अभिभावक परेशान हैं। नशा निवारण केंद्र के अलावा उनके पास कोई स्थायी समाधान नहीं है। खास बात है कि चिट्टा जैसी गंभीर बीमारी से युवाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए जिला में युवा आगे आए हैं। संवाद
बॉक्स


युवाओं को पकड़कर उनकी वीडियो वायरल करने से इसका समाधान नहीं है। उन्हें अस्पताल या काउंसलर के पास ले जाने की जरूरत है। कई युवा हैं जो चिट्टा छाेड़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही से परामर्श नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में परामर्शदाता और इलाज की स्थायी व्यवस्था करवाने का मामला सरकार के ध्यान में लाया जाएगा। हमारी टीम सदर में युवाओं की निगरानी रख रही है।
अंकुश मोहन, जिला अध्यक्ष, इंटक मंडी


हमारे पास सराज में 15 युवाओं की टीम है जो निगरानी रख रही है। जनता को साथ देना होगा। अभी तक क्षेत्र में चिट्टा बेचने को लेकर कोई सूचना नहीं मिली है। अस्पताल में परामर्शदाता और इलाज की स्थायी व्यवस्था होना जरूरी है ताकि चिट्टे में संलिप्त युवा खुद परामर्श लेकर अपना इलाज करवा सकें। सरकार के समक्ष इस बात को ध्यान में लाया जाएगा।
तरुण ठाकुर, उपाध्यक्ष, युवा कांग्रेस
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अगर किसी युवा को पकड़ते हैं तो पुलिस को सौंपने के साथ उसके अभिभावकों को जागरूक करना भी जरूरी है। कहां इलाज हो सकता है। युवाओं को पीटने से कुछ नहीं होगा। अस्पताल में परामर्शदाता और इलाज की व्यवस्था तो है लेकिन बेहद कम इनसे परामर्श ले रहे हैं। परामर्श और इलाज को लेकर मामला सरकार के ध्यान में लाया जाएगा। हमारी टीम धर्मपुर में काम कर रही है।
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जितेंद्र कुमार, पूर्व सचिव कांग्रेस

कोट्स
जिला के कई अस्पताल में परामर्शदाता और मनोचिकित्सक आदि डॉक्टर हैं। नशा निवारण केंद्र भी खोले हैं। चिट्टे में संलिप्त युवाओं को नशे की जगह मिल रही है, लेकिन अस्पताल का रास्ता नहीं मिल रहा है। अभिभावकों को चाहिए कि वह बच्चों पर नजर रखें और गड़बड़ी पर अस्पताल में परामर्शदाता और मनोचिकित्सक की मदद ले सकते हैं।
-डॉ. नरेंद्र कुमार भारद्वाज, मुख्य चिकित्साधिकारी
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