पांगणा क्षेत्र में देव रथ यात्रा का भव्य स्वागत, बेड़-झाड़े से दिया आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
करसोग (मंडी)। सुकेत क्षेत्र में आयोजित भव्य देव मेले के समापन के बाद चौरासी सिद्ध परंपरा से जुड़े देवताओं की अपने मूल स्थानों की ओर वापसी शुरू हो गई है। इसी क्रम में सिद्ध नाग चवासी (चोपड़ू), नाग महोगी और झकड़ु नाग के पांगणा क्षेत्र पहुंचने पर साना गांव में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। ग्रामीणों ने स्थानीय परिवारों की अगुवाई में देवता का पारंपरिक विधि-विधान से भव्य स्वागत किया।
देवता ने साना गांव में रात्रि प्रवास किया, जहां बेड़ और झाड़े की प्राचीन परंपरा के माध्यम से श्रद्धालुओं को उनके वर्तमान और भविष्य के संबंध में मार्गदर्शन दिया। इस दौरान पूरे गांव और परिवारों के सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद भी प्रदान किया गया। महिला मंडल साना द्वारा प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
देव रथ यात्रा के दौरान परंपराओं का सख्ती से पालन किया जा रहा है। नाग चवासी के मुख्य कारदार टीसी ठाकुर के अनुसार, जब तक देव रथ अपनी यात्रा पूर्ण कर कोठी में वापस नहीं लौटता, तब तक श्रद्धालुओं के परिवार खेतों में हल नहीं चलाते और किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह या गृह प्रवेश नहीं किए जाते।
इतिहासकार डाॅ. हिमेंद्र बाली व संस्कृति मर्मज्ञ डाॅ. जगदीश शर्मा का कहना है कि देव रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इतिहास, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। चौरासी सिद्ध और नाग चवासी की यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का सशक्त माध्यम बनी हुई है।