गोहर (मंडी)। फंड की कमी के चलते मंडी जिले में शिक्षा विभाग एक भी स्कूल में लाइटनिंग कंडक्टर नहीं लगा पाया है। पिछले वर्ष रोहांडा के औकल स्कूल भवन में बिजली गिरने से इसकी चपेट में आने से एक बच्ची की मौत हो गई थी। जिला उपायुक्त ने हादसे के बाद शिक्षा विभाग को आदेश जारी किए थे कि लाइटनिंग जोन में जो स्कूल आते हैं, वहां लाइटनिंग कंडक्टर लगाए जाएं। एक साल में जिला के एक भी स्कूल में लाइटनिंग कंडक्टर नहीं लगा है। उच्च शिक्षा उप निदेशक ने जिला के सभी स्कूलों को पत्र जारी कर लाइटनिंग कंडक्टर लगाने के आदेश जारी किए थे।
मगर शिक्षा उप निदेशक को तमाम स्कूलों से यही जवाब मिला कि बजट के अभाव में स्कूल प्रबंधन स्कूल में लाइटनिंग कंडक्टर लगाने में असमर्थ है। मंडी जिले में शिक्षा विभाग के 20 ब्लॉक हैं। जिनमें करीब 18 सौ प्राइमरी स्कूल हैं। जिले के करसोग, सुंदरनगर, गोहर, सराज और द्रंग ब्लॉक बिजली गिरने की घटनाओं में संवेदनशील ब्लॉक हैं। जहां के स्कूलों में कभी भी बिजली गिर सकती है। हाल ही में देवीदहड़ में बिजली गिरने से 35 भेड़ बकरियों की मौत हो चुकी है। मार्च से जुलाई तक जिला में बिजली गिरने की अधिकतर संभावना होती है।
क्या है लाइटनिंग कंडक्टर
लाइटनिंग कंडक्टर बिजली गिरने से मकान को बचाने का एक यंत्र हैं। जिसमें कॉपर धातु प्रयोग की जाती है। मकान या भवन के छत कॉपर स्ट्रिप को जमीन तक लगाया जाता है। जो बिजली गिरने पर मकान या भवन को पूरी तरह सुरक्षित रखता है। लाइटनिंग कंडक्टर यंत्र स्थापित करने का खर्चा 10 से 12 हजार रुपये के बीच आता है।
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स्कूल मुखिया को लाइटनिंग कंडक्टर लगाने के निर्देश दिए गए थे। मगर बजट के अभाव में यह अभियान सिरे नहीं चढ़ पाया है। अब स्कूल बिल्डिंग फंड का बजट लाइटनिंग कंडक्टर लगाने के लिए प्रयोग में लाने के आदेश दिए गए हैं।
...सुशील पुंडीर संयुक्त निदेशक शिक्षा विभाग