पधर उपमंडल के गांव मसेरन में खेतों में उगाई फसल का जायजा लेते हुए दुनी चंद। स्त्रोत विभाग
पधर (मंडी)। उपमंडल पधर के मसेरन गांव के दुनी चंद ने अपनी मेहनत और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाकर खेती में सफलता की नई इबारत लिखी है। दुनी चंद वर्ष 2020 में हिंदुस्तान साल्ट लिमिटेड से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने खेतीबाड़ी को आजीविका स्रोत बनाया, बल्कि एक साल में ही चार लाख रुपये से अधिक की कमाई करके यह साबित कर दिया कि खेती में अपार संभावनाएं हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन न होने के कारण दुनी चंद ने खेती की ओर रुख किया। शुरुआत में उन्हें बंदरों और जंगली जानवरों से फसल को नुकसान पहुंचने के कारण निराशा हुई। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। एक किसान जागरूकता शिविर में उन्हें कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी मिली, जिससे उनकी उम्मीदें फिर जाग उठीं।
उन्होंने मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना के तहत अपने चार बीघा खेतों की बाड़बंदी करवाई। इसके बाद एंटी हेलनेट और बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए पॉलीहाउस का भी निर्माण करवाया। इन योजनाओं का फायदा उठाकर दुनी चंद ने अब अपने खेतों में बेमौसमी फसलें, प्राकृतिक खेती से मौसमी सब्जियां और मक्की, कोदरा जैसी फसलों की खेती शुरू की। परिणामस्वरूप, एक साल के भीतर उन्होंने चार लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर ली। अपनी इस सफलता के साथ उन्होंने दो अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान किया है।
कृषि विशेषज्ञ सोनम कुमारी के अनुसार दुनी चंद जैसे किसानों ने यह साबित किया है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके खेती में अपार संभावनाएं हैं। दुनी चंद की कहानी अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो अपनी जमीन से बेहतर आय अर्जित करने की दिशा में काम कर सकते हैं।