कितनी लंबी हैं दोनों सुरंगें
डयोड में 2.8 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। वहीं, हणोगी की सुरंग की लंबाई 650 मीटर है। इन दोनों सुरंगों के शुरू होने से करीब छह किलोमीटर का प्रभावित सड़क हिस्सा घटकर लगभग 3.5 किलोमीटर रह जाएगा। इसका सीधा फायदा यातायात को मिलेगा और वाहन पहले के मुकाबले आसानी से निकल सकेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दोनों सुरंगों को यातायात के लिए खोले जाने की जानकारी साझा की है। सुरंगों के शुरू होने से इस मार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालकों और पर्यटकों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
दो घंटे का सफर एक घंटे में होने की उम्मीद
पंडोह बाईपास के अंत से टकोली तक 18.908 किलोमीटर लंबे फोरलेन प्रोजेक्ट पर 4,465.94 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत बनाई जा रही है। फोरलेन और सुरंगों के पूरी तरह उपयोग में आने के बाद सामान्य यातायात की स्थिति में मंडी से कुल्लू का सफर करीब दो घंटे से घटकर एक घंटे रह सकता है।
इसका मतलब यह है कि मंडी से कुल्लू जाने वाले लोगों को रास्ते में कम समय लगेगा। कुल्लू-मनाली जाने वाले पर्यटकों के लिए भी सफर आसान होगा। हालांकि, जाम, मौसम और सड़क की स्थिति के कारण यात्रा का समय अलग-अलग हो सकता है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज शुक्रवार को खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए इन टनल के खुलने की जानकारी शेयर की। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि इन सुरंगों के खुलने से कुल्लू-मनाली और आगे लेह-लद्दाख जाने वाले मार्ग पर यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
डयोड सुरंग की लंबाई 2.8 किलोमीटर है, जबकि हनोगी सुरंग 650 मीटर लंबी है। दोनों सुरंगें इस मार्ग के दो महत्वपूर्ण बाधा बिंदुओं को दूर करेंगी। पर्यटन सीजन के दौरान जोगनी माता मंदिर, डयोड और हनोगी के आसपास अक्सर लंबा जाम लग जाता था। कई बार इन स्थानों पर वाहनों को एक से दो घंटे या उससे अधिक समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता था।
सुरंगों के खुलने से प्रभावित सड़क का हिस्सा छह किलोमीटर से घटकर करीब 3.5 किलोमीटर रह जाएगा। इससे यातायात का प्रवाह बेहतर होगा और यात्रियों को जाम से राहत मिलेगी। सामान्य यातायात परिस्थितियों में मंडी से कुल्लू की यात्रा का समय करीब दो घंटे से घटकर लगभग 60 मिनट होने की उम्मीद है।
यह कार्य एंड ऑफ पंडोह बाईपास-टकोली खंड के 4-लेन प्रोजेक्ट का हिस्सा है। 18.908 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के निर्माण पर 4,465.94 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत विकसित किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद सड़क संपर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सुरंगों के खुलने से न केवल स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि कुल्लू-मनाली जाने वाले पर्यटकों और लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।