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Mandi News: नमी न होने से बगीचों के कार्य भी लटके

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बालीचौकी (मंडी)। बारिश और बर्फबारी न होने से फसलों पर आश्रित सराज घाटी के किसानों-बागवानों की मौसम ने कमर तोड़ कर रख दी है। जंजैहली, थुनाग, बागाचुनौगी, थाची, सुधरणी, थाटा, कल्हणी और सराची सहित आस-पास के इलाकों में स्थिति चिंताजनक बनी है। सूखे खेतों में डाले गए बीज भी बाहर नहीं निकल पाए हैं।
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सेब और अन्य पौधे भी सूखने लगे हैं। पर्याप्त नमी न होने से सेब पौधों के तौलिए और अन्य कार्य अभी तक शुरू नहीं हुए हैं। किसानों- बागवानों का कहना है कि पिछली बार भारी बारिश से सेब और अन्य फसलें काली हो गई थीं। इस कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। इस बार मौसम की बेरुखी से सेब और अन्य फसलों को अधिक नुकसान हो सकता है।
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पिछली बार बारिश से बागवानों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। इस बार समय पर बारिश न होने से ड्राई स्पैल लंबा हो गया है। इस कारण जमीन में नमी नहीं रही है। अभी सेब के चिलिंग आवर्स भी पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में इसका सीधा असर बागवानों पर पड़ रहा है।
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-मोतीराम नेगी, प्रसार अधिकारी बागवानी विभाग
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गत वर्ष भारी बारिश के कारण सेब की फसल पेड़ों पर ही खराब हो गई। इस बार बारिश और बर्फबारी न होने से सेब की फसल को नुकसान हुआ है। यदि समय के साथ बारिश नही होती तो बागवानों और किसानों को रोजी रोटी के लाले पड़ जाएंगे।
-हेमराज, बागवान

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चार माह से बारिश न होने से और सुबह शाम कोहरा पड़ने से घाटी में कड़ाके की ठंड हो रही है। इससे सेब के लिए चिलिंग आवर्स भी पूरे नहीं हो पा रहे, वहीं सेब के पौधों के तौलिए भी नही बन पाए हैं। बारिश न हुई तो इस बार बागवानों को काफी नुकसान होगा।
-देवेंद्र कुमार, बागवान
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बारिश न होने से फसलों को नुकसान पहुंच रहाहै। सिंचाई व्यवस्था न होने से किसान आसमान की ओर आस लगाए हुए हैं। जमीन में नमी न रहने से अब घाटी में पशुओं के लिए चारे का भी संकट खड़ा हो गया है।
-गोकुल चंद, किसान

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किसान-बागवान बैंक से केसीसी बनाकर बगीचों और अन्य कार्य करते हैं लेकिन दो तीन वर्षों से मौसम की बेरुखी के कारण किसानों की फसलें खराब हो रही हैं। इस कारण बैंकों से लिया ऋण चुकाना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। सरकार आकलन करवा कर नुकसान का मुआवजा दे।
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-केसर सिंह, किसान
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