नशे के जाल से बाहर लाएगी व्यावहारिक शिक्षा
विशेषज्ञ बोलेे, बढ़ते अपराधों की रोकथाम के लिए शिक्षा प्रणाली में बदलाव जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
सुंदरनगर (मंडी)। प्रदेश में लगातार बढ़ रहे गंभीर अपराधों को लेकर अब समाज में स्थायी समाधान की आवश्यकता महसूस की जा रही है। मनोचिकित्सकों और शिक्षाविदों का मानना है कि अपराधों की जड़ में मनोवैज्ञानिक कारणों की अनदेखी और शिक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक कानूनी ज्ञान की कमी प्रमुख वजह है। ऐसे में स्कूल और कॉलेज स्तर पर मनोविज्ञान और व्यावहारिक कानूनी शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि अपराधों की रोकथाम सामाजिक स्तर पर ही संभव हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में गंभीर अपराधों से जुड़े विषय पुलिस और न्यायालय तक सीमित रह जाते हैं, जबकि आम नागरिक, विशेषकर छात्र इनसे अनभिज्ञ रहते हैं। पर्यावरण शिक्षा की तर्ज पर व्यावहारिक कानूनी शिक्षा को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। दूसरी ओर समाज में बढ़ते नशे के प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
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मनोविज्ञान के अनुसार व्यक्ति का स्वभाव, नशे की लत और मानसिक बीमारियां उसे गंभीर अपराध करने की ओर प्रेरित कर सकती हैं। वहीं, परिवार और समाज की सामूहिक जागरूकता से इन पर नियंत्रण पाया जा सकता है। किसी भी व्यक्ति की परवरिश ही समाज में सकारात्मक या नकारात्मक व्यवहार की नींव रखती है। वर्तमान समय में मनोचिकित्सा के माध्यम से अधिकांश मानसिक बीमारियों का उपचार संभव है। -डॉ. सोनाली महाजन, मनोचिकित्सक, नेरचौक मेडिकल कॉलेज
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स्कूल और कॉलेज स्तर पर छात्रों को गंभीर अपराधों के प्रति जागरूक रखने के लिए कानून की शिक्षा को पर्यावरण शिक्षा की तरह अनिवार्य बनाया जाना चाहिए। इससे छात्र संकट की स्थिति में स्वयं की सुरक्षा के प्रति सजग हो सकेंगे और अपराध के समय सही निर्णय लेने में सक्षम बनेंगे। सरकार को चाहिए कि उच्च शिक्षा में मनोविज्ञान के साथ अपराधों से निपटने की व्यावहारिक शिक्षा भी शामिल की जाए। -प्रो. विनोद कुमार, एमएलएसएम कॉलेज, सुंदरनगर
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कोविड काल की तरह रैंडम सैंपल लेकर नशे की जांच करना आज जरूरी हो गया है, ताकि यदि कोई नशे से ग्रस्त हो तो उसका उपचार करवाया जा सके। नियमित समीक्षा के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाई जानी चाहिए। मौजूदा समय में अब बदलाव की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। -प्रकाश बंसल, सदस्य, जिला नशा निवारण समिति