कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के वैज्ञानिकों ने किसानों को बताए तकनीक के फायदे
नैनो यूरिया मिट्टी और फसल के लिए उपयोगी : डॉ. दिनेश
संवाद न्यूज एजेंसी
संधोल (मंडी)। कृषि विज्ञान केंद्र सुंदरनगर के वैज्ञानिकों ने संधोल के डोघी क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से नैनो यूरिया का छिड़काव किया। केंद्र के वैज्ञानिक डाॅ. दिनेश यादव ने किसानों को इस तकनीक के फायदे गिनाए। कहा कि रासायनिक खादों के अत्यधिक इस्तेमाल से फसलों पर काफी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। फसल उत्पादन की लागत बढ़ गई है और खाद की मांग भी अधिक रहती है।
ऐसे में सरकार किसानों को दानेदार यूरिया के बजाय नैनो यूरिया के इस्तेमाल के प्रति प्रेरित करने के लिए कदम उठा रही है। तरल रूप में मौजूद नैनो यूरिया से खेत में आवश्यकता से अधिक यूरिया के छिड़काव से पैदा होने वाली समस्याएं दूर हो सकती हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत किसानों को जागृत करने के लिए कृषि विभाग को ड्रोन से नैनो यूरिया का छिड़काव करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
सोमवार को विभाग ने ड्रोन के माध्यम से करीब 150 बीघा खेतों में नैनो यूरिया का छिड़काव कर किसानों को डेमो (प्रदर्शन) दिया गया। किसानों को खेतों में खाद डालने के लिए लगभग 4 से 5 घंटे लगते हैं लेकिन अब करीब आधे घंटे में ही बिना मेहनत के उसका काम ड्रोन कर सकता है। नैनो यूरिया मिट्टी और फसल के लिए भी उपयोगी होती है। इससे मृदा की उपजाऊ क्षमता कम नहीं होती है। एक बार में ड्रोन 10 लीटर तक तरल पदार्थ लेकर उड़ सकता है। 10 लीटर पानी में महज 40 मिलीलीटर नैनो यूरिया मिलाया जाता है जिसे आसानी से खेतों में स्प्रे किया जा सकता है।
सेवानिवृत्त कृषि विकास अधिकारी डाॅ. मोहन लाल भरमौरिया ने बताया कि उन्होंने डेमो की मांग विभाग से की थी। खास बात यह कि स्प्रे का दुष्प्रभाव भी मानव शरीर पर नहीं पड़ेगा। एक दिन में एक ड्रोन से आसानी से 20 से 25 एकड़ जमीन में छिड़काव किया जा सकता है। इस मौके पर किसान मौजूद रहे। संवाद