मंडी। मंडी सदर क्षेत्र से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित धार कोटमोर्स पंचायत के मढ़धार गांव में इससे पहले भी जून 2024 में भी डायरिया फैला था। उस दौरान करीब दो दर्जन लोग जोनल अस्पताल में भर्ती हुए थे। उस समय भी लोगों ने पेयजल स्रोतों के पानी में खराबी को कारण बताया था। विभाग ने सैंपल जांच के बाद बावड़ी के पानी को दूषित बताया था।
ग्रामीणों का कहना है कि मढ़धार गांव के लिए नाले से सीधी पेयजल आपूर्ति की जाती है। इस कारण लोग बीमार हो रहे हैं। पंचायत प्रधान धर्मपाल ने बताया कि बीते वर्ष गांव में डायरिया के मामले आने पर उन्होंने जल शक्ति विभाग से फिल्टर टैंक निर्माण की बात की थी। जिसे स्वीकृत करते हुए विभाग ने 3 लाख की राशि से पुराने पेयजल स्रोत से करीब आधा किलोमीटर दूर फिल्टर बैंड पेयजल भंडारण टैंक तैयार किया है। कुछ कार्य शेष रहने पर इसे चालू नहीं किया है। लाइनों को जोड़ने के बाद एक सप्ताह में ही ग्रामीणों के लिए नए टैंक से जलापूर्ति शुरू हो जाएगी।
वहीं, गांव में अब फिर डायरिया की चपेट में आए 10 लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। मंडी शहर के निजी अस्पतालों में भर्ती बुधवार को 95 वर्षीय फूला देवी व 87 वर्षीय लक्ष्मी के स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें भी अस्पताल से छुट्टी दे दी है। अभी जोनल अस्पताल में केवल 14 वर्षीय अनुष्का उपचाराधीन है, उसे वीरवार को घर भेज दिया जाएगा। जबकि गांव में घरों में उपचार ले रहे अन्य पांच लोग भी अब ठीक हैं।
जल शक्ति एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी डायरिया प्रभावित गांव में नजर रखे हुए हैं। दो दिनों पूर्व लोगों में उल्टी, दस्त, बुखार की शिकायत होने पर कुछ लोगों को मंडी शहर के निजी व सरकारी अस्पतालों में भर्ती करवाया था, जबकि अन्य लोग घरों पर ही उपचार ले रहे थे। मामला सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग व जल शक्ति विभाग के अधिकारी स्वयं कर्मचारियों के साथ मढ़धार गांव पहुंचे थे। जिन्होंने बीमार चल रहे लोगों को दवाइयां और ओआरएस घोल के पैकेट दिए थे। जल शक्ति विभाग के दल ने पेयजल स्रोतों से पानी के सेंपल भर कर उन्हें लैब में जांच के लिए भेजा था।
उधर, धार कोटमोर्स पंचायत प्रधान धर्मपाल ने बताया कि गांव में बीमार चल रहे लोगों के स्वास्थ्य में अब सुधार हुआ है। वहीं, सीएमओ डाॅ. एनके भारद्वाज ने बताया कि मरीजों के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।
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मढ़धार गांव के जल आपूर्ति स्रोत और प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी के सैंपल भरे हैं। रिपोर्ट आने पर ही असली कारणों का पता चलेगा।
-राजकुमार सैनी, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग मंडी