सराज क्षेत्र के थाची गांव में बुराई के खात्मे को आयोजित देव श्री बिट्ठू नारायण के गढ़ में फागली उ?
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गोहर (मंडी)। सराज क्षेत्र के थाची गांव में अधिष्ठाता देव बिट्ठू नारायण के बहड़ों में त्रिवर्षीय फागली उत्सव मनाया जा रहा है। देवताओं के मुखौटे पहनने वाले देवलुओं को देखने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।
देवता बिट्ठू नारायण 9 दिन की परिक्रमा पर हैं। फागली उत्सव हर तीन साल बाद थाची गांव से शुरू होकर थाची गांव में ही संपन्न होता है। पुजारी ओत राम शर्मा ने बताया कि बुरी शक्तियों के खात्मे को लेकर होने वाले फागली उत्सव को देवता के प्रमुख बहड़ों या हारियों में नौ दिन तक अलग-अलग जगह उत्सव मनाया जाएगा। इसका आगाज शुक्रवार से थाची में हो गया है। दूसरे दिन बटबाड़े फागली, तीसरे दिन काहू चोहाड़ी फागली, चौथे दिन खलोचड़े घिरड़े फागली, पांचवें दिन डुन घुनारायण फागली, छठे दिन गागनी फागली, सातवें और आठवें दिन विश्राम होता है। नौवें और अंतिम दिन फिर थाची गांव में फागली उत्सव होता है।
यहां इसका विधिवत समापन किया जाएगा। देव बिट्ठू नारायण के मुख्य कारदार देवकी नंद ने कहा कि पहले बिट्ठू नारायण का फागली उत्सव लगातार 9 साल तक मनाया जाता था। इस का आयोजन उत्तर भारत से होते हुए सिक्किम तक किया जाता था। इस दौरान कई लोग सफर में ही मर जाते थे। उन्होंने बताया कि यात्रा की जटिलता को देखते हुए बीते पांच दशक से अब फागली उत्सत केंद्र नौ दिन तक मनाया जाता है।
प्रधानाचार्य जीवाननंद ठाकुर ने कहा कि फागली की विशेषता यह है कि इसमें दो मुखौटे नारायण जी के एक मुखौटा लक्ष्मी जी का एक हनुमान जी का होता है। फागली के शुरू और अंत में घड़ेही होती है। इसमें लंका आक्रमण की व्यूहरचना रची जाती है। हर जाति के लोग मुखौटे पहनते हैं।