मंडी। मंदिरों की घंटियों की आवाज से सुबह जगने वाला मंडी शहर देवलोक में बदल गया है। आस्था के उमड़े जनसैलाब में हर किसी की जुबां पर जय देवा शब्द है। पूरा शहर बाम, करनाल, रणसिंगे और शहनाइयां की देवध्वनियां से गूंज रहा है। अपने देवता की शान में देवलुओं की वाद्ययंत्रों से जुगलबंदी आस्था के देवकुंभ को और आकर्षित बना रही है। देवताओं के साथ पहुंचे देवलू गांव की सामूहिक सहभागिता पेश कर रहे हैं। कोई ढोल, कोई नगाड़ा तो कोई देवता की शान में शहनाइयों की देवध्वनियां छेड़ रहे हैं।
सोशल मीडिया से दूरी बनाकर युवा भी बुजुर्गों के साथ वर्षों पुराने देवकुंभ को आगे बढ़ा रहे हैं। हर गांव से देवता के साथ करीब 50 से 100 देवलू पहुंचे हैं। दिन के अलावा रात को एक साथ रह रहे हैं।
गांव के लोगों में आपसी प्यार और भाईचारा 21वीं सदी के इस दौर में भी कायम है। सोने चांदी की पालकियों में सवार देवी-देवता जिस तरह एक दूसरे से मिलन कर रहे हैं, इसी तर्ज पर देवलू भी अपने देवता की शान में आपसी प्यार और भाईचारे की मिसाल पेश कर हिमाचली संस्कृति की पहचान करवा रहे हैं। अगली पीढ़ी भी इस प्रथा को संजोए रखने में अहम भूमिका निभा रही है। रविवार को निकाली महाशिवरात्रि की दूसरी जलेब में 70 फीसदी बजंतरी और देवलू युवा रहे। अपनी संस्कृति और आस्था से उनका लगाव जलेब में दिख रहा था। हर देवलू अपनी धुन में व्यस्त था।
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युवा पीढ़ी आस्था के महाकुंभ को आगे बढ़ाने में अपनी जिम्मेदारी समझ रही है। मेले में आकर गांवों का आपसी प्यार और भाईचारे की मिसाल भी दे रहे हैं। सभी के सामूहिक कर्तव्य से ही आस्था का यह महाकुंभ सदियों से चला आ रहा है।
-डिकपाल शास्त्री, पुजारी माहूंनाग मंदिर तरौर