मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित भवन के मुआवजे को बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि मध्यस्थ की ओर से पारित अवार्ड में कोई ऐसी स्पष्ट अवैधता नहीं पाई गई, जिसके आधार पर उसमें हस्तक्षेप किया जा सके।
मामले के तथ्यों के अनुसार औट तहसील के कोटाधार निवासी सुंदर सिंह ने एनएचएआई और भूमि अधिग्रहण अधिकारी के खिलाफ याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि फोरलेन निर्माण के लिए अधिग्रहित उनके भवन का मूल्यांकन कम दरों पर किया गया। उन्होंने भवन के लिए निर्धारित प्लिंथ एरिया रेट बढ़ाने, अतिरिक्त मुआवजा, पुनर्वास लाभ, किराया, व्यवसायिक नुकसान और अन्य वैधानिक लाभ देने की मांग की थी।
रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भवन का अधिग्रहण फोरलेन परियोजना के लिए किया गया था और वर्ष 2019 में अनुपूरक अवार्ड के तहत मुआवजा दिया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने मुआवजा बढ़ाने के लिए मध्यस्थ के समक्ष दावा दायर किया। मध्यस्थ ने जून 2024 में पारित अवार्ड में भवन मुआवजा बढ़ाने से इंकार किया था, हालांकि वैधानिक लाभ और ब्याज देने के निर्देश दिए थे।अदालत ने याचिकाकर्ता की दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि आदेश उसकी अनुपस्थिति में पारित किया गया। फैसले में कहा गया कि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मध्यस्थ के समक्ष उपस्थित थे। भवन के मूल्यांकन और प्लिंथ एरिया रेट को लेकर मध्यस्थ की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया में कोई गंभीर त्रुटि नहीं पाई गई। अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए पक्षों को अपने-अपने खर्च स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।