अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए रवाना होते आराध्य देवता छांजणू और देव छमांहू। संवाद
बालीचौकी (मंडी)। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए उपमंडल बालीचौकी के आराध्य देवता छांजणू और देव छमांहू सोमवार को अपने मूल स्थान धबेहड़ देवालय से रवाना हुए। छांजणू देवता बौंछड़ी जबकि छमांहू देवता खणी स्थित अपने मूल स्थान से महाशिवरात्रि के लिए रवाना हुए।
दोनों देवता एक साथ महाशिवरात्रि मेले के लिए निकले। देवता के भंडारी दिले राम ने बताया कि दोनों देवताओं के साथ करीब 500 देवलू रवाना हुए। बालीचौकी मुख्यालय से होते हुए शाम तक दाउंट पंडोह पहुंचेंगे और यहीं पर ठहराव करेंगे। दूसरे दिन मंडी के निकट बासा नामक स्थान में रुकेंगे। 26 फरवरी को मंडी पहुंचेंगे जहां राज देवता माधोराय के मंदिर में हाजिरी भरेंगे।
मंडी महाशिवरात्रि की जलेब में दोनों देवताओं का अहम स्थान है। देव छमांहू शेषनाग के अवतार जबकि देव छांजणू माता हिडिंबा के पुत्र घटोत्कच का प्रतिरूप माने जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि में शिरकत करने वाले कुछ देवताओं का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। देव घटोत्कच पांडव भीम के पुत्र कहलाते हैं। घटोत्कच के गुरु देव छांजणू के रूप में जाने जाते हैं। दोनों देवता गुरु-शिष्य की परंपरा को आज भी बखूबी निभा रहे हैं। संवाद